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Sultanpur

आज नई परम्परा को जन्म देती पंख फाउंडेशन की संचालिका रोशनी तिवारी

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सुल्तानपुर: पंख फाउंडेशन जहां सामाजिक कार्यो के लिए जाना जाता है वही आज पंख की संचालिका ने तमाम रूढ़ियों को अंधविश्वास को तोड़कर एक नई परमपरा को जन्म दिया।जहां पिता की विरासत में मिली परम्परा को बेटे आगे बढाते हैं वही आज की इस बेटी ने लम्भुआ थाने से लावारिस शव को सुल्तानपुर हथिया नाला पर लाकर शव को मुखाग्नि कर अंतिम संस्कार किया।
रोशनी तिवारी आज सुल्तानपुर के इतिहास में एक नई कड़ी जोडकर इतिहास को बदल डाला। समाज ने इस परम्परा को बेटों के अधीनस्थ कर दिया था आज इन्होंने इसे झुठलाया है कि बेटे ही नही बेटियां भी बेटो से कम नही है वैसे बेटों के न होने पर बेटियों को मुखाग्नि करते सुना गया था लेकिन किसी लावारिस लाश का दाह संस्कार करना यह हमारी संस्कृति में पहला कार्य हो सकता है ।।

रोशनी तिवारी से पूछा गया कि यह कार्य तो हमारी संस्कृति में पुरुषों को दिया है महिलाओं को नही। तो कहा लोगों के अच्छे विचारों व कार्यो से हमारी संस्कृति का विकास होता है और लड़कियों को चाहिए कि आगे आये ये कोई नई बात नहीं है इस कार्य को सबको आगे आकर करना चाहिए जिससे लड़के या लड़कियोअसमानता की मानसिकता बदली जा सके।अच्छे कार्यों के लिए क्या पुरुष ,क्या महिला। फाउंडेशन तो सामाजिक कार्यकर्ता के रुप मे बच्चों को स्वच्छता अभियान से जोड़ना व सफाई कर्मियों को सम्मानित करना गौ रक्षा आदि जैसे सामाजिकता के पुनीत कार्यों में अपनी सहभागिता सदैव रखी है। समाज को नए आयाम स्थापित करना इस पँख फाउंडेशन के परम्परा में है और सदैव रहेंगी।

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