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*कम्युनिष्ट कार्यकर्ता सहित दो हुए जिला बदर*

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सुलतानपुर। हत्या, गैंगेस्टर व बल्बा सहित अन्य अपराधों से जुड़े कम्युनिष्ट कार्यकर्ता सहित दो आरोपियों के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में गुंडा एक्ट मामले की सुनवाई चली। जिसमें जिला मजिस्ट्रेट संगीता सिंह ने दोनों आरोपियों के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही करने का आदेश दिया है।
मालूम हो कि लम्भुआ थाना क्षेत्र के खसड़े निवासी बृजेश सिंह सुत कौशलेन्द्र सिंह के खिलाफ हत्या व गैंगेस्टर सहित अन्य मामले दर्ज है। वहीं अखंड नगर थाना क्षेत्र के हमजापुर- ताजुद्दीनपुर निवासी कम्युनिष्ट पार्टी कार्यकर्ता सुनील सिंह सुत भरतराज सिंह के खिलाफ बल्बा व दलित उत्पीड़न समेत अन्य मामले दर्ज है। दोनों आरोपियों के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में गुंडा अधिनियम के अन्तर्गत हुई कार्यवाही पर सुनवाई चली। इस दौरान बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया। वहीं ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी नवीन कुमार दूबे ने दोनों आरोपियों के जरिए आपराधिक गतिविधि लगातार जारी रखने का तर्क रखते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात जिला मजिस्ट्रेट संगीता सिंह ने कम्युनिष्ट कार्यकर्ता सहित दोनों आरोपियों के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की पेशी को छोड़कर पूरे छः माह तक जिले की सीमा में प्रवेश न करने का आदेश दिया है।

*विधायक का पैड लगवाना पड़ा महंगा, लाईसेंस निरस्त*
*डीएम ने जनहित में की शस्त्र लाईसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही*
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सुलतानपुर। रिवाल्वर का लाईसेंस बचाने के लिए तत्कालीन सपा विधायक व पूर्व विधायक सहित अन्य सम्भ्रान्त नागरिको का पैड लेटर लगवाना लाईसेंस धारक को महंगा पड़ गया है। जिला मजिस्ट्रेट संगीता सिंह ने ऐसे व्यक्ति के पास शस्त्र लाईसेंस बने रहना लोक व्यवस्था के खिलाफ मानते हुए लाईसेंस निरस्त कर दिया है।
मामला कादीपुर कोतवाली क्षेत्र के भलुवाही गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले सुरेन्द्र प्रसाद के खिलाफ 04 अगस्त 2012 को दिन में हुई घटना को बताते हुए गांव के ही अभियोगी राजेन्द्र प्रसाद साव ने लाईसेंसी रिवाल्वर से मारने के लिए दौड़ाने समेत अन्य आरोप लगाए थे। जिसके सम्बंध में कादीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ और आरोप पत्र भी सुरेन्द्र के खिलाफ दाखिल हुआ। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने एक सितम्बर 2012 को सुरेन्द्र का शस्त्र लाईसेंस निलम्बित करते हुए कारण बताओं नोटिस जारी किया था। जिस पर हाजिर हुए सुरेन्द्र प्रसाद के पक्ष ने अपने पर लगे आरोपों को निराधार बताया और सत्ता पक्ष के दबाव में जान-बूझकर शस्त्र निलम्बन की कार्यवाही का तर्क रखा। यही नहीं अपनी सफाई को बल देने के लिए सुरेन्द्र ने तत्कालीन सपा विधायक रामचंदर चौधरी पूर्व बसपा विधायक भगेलू राम, नगर पंचायत अध्यक्ष चम्पा सिंह व ग्राम प्रधान प्रभावती का प्रमाण पत्र भी जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल किया। मामले में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अपने को बेकसूर बताते हुए सम्भ्रात व्यक्तियों का पैड लेटर लगाने की बात कही। वहीं जिला मजिस्ट्रेट ने सुरेन्द्र की इस कार्यशैली को कोर्ट पर राजनैतिक दबाव बनाने के आशय से मानते हुए उसे आपराधिक प्रवृत्ति का माना और ऐसे व्यक्ति के पास लोक शांति व लोक व्यवस्था के मद्देनजर शस्त्र लाईसेंस बने रहना उचित न मानते हुए शस्त्र लाईसेंस निरस्त कर दिया। जिला मजिस्ट्रेट संगीता सिंह ने शस्त्र निरस्तीकरण कार्यवाही की प्रति पुलिस अधीक्षक व प्रभारी अधिकारी आयुध को भेजने का आदेश दिया है।

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