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LUCKNOW

कौन थे कृष्णानंद राय ? हत्या करने वाला मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या

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कृष्णनंद राय
उत्तर विधानसभा के सदस्य उत्तर प्रदेश
व्यक्तिगत विवरण
उत्पन्न होने वाली 11 दिसंबर 1 9 56
गाज़ीपुर , उत्तर प्रदेश , भारत
मर गए 2 9 नवंबर 2005
बसवानिया उत्तर प्रदेश
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (1 999-2005)
व्यवसाय ठेकेदार राजनेता

कृष्णनंद राय 11 दिसंबर 1 9 55 को भारत के उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जिले में पैदा हुए एक भारतीय राजनेता थे। उन्होंने 2002 से 2005 तक गाजिपुर जिले में स्थित मोहम्मदबादविधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हुए विधान सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया। राजनीति में उनका पहला कार्यकाल 1 999 में उसी विधानसभा सीट से था, जिसे वह हार गया था। वह अपनी जनता तक भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा थे

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा 

राय उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जिले के गोंडौर गांव में ललिता राय और जगन्नाथ राय के लिए पैदा हुए तीन भाइयों में से सबसे कम उम्र के थे। समृद्ध और उपजाऊ गैंगेटिक बेसिन के आस-पास पर्याप्त कृषि भूमि के साथ, परिवार के लिए कमाई और आजीविका का प्राथमिक स्रोत कृषि था। उनकी मां की मृत्यु हो गई जब वह एक वर्ष का था और उसके बाद वह अपनी दादी द्वारा उठाया गया था। उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा देशी गांव में की गई थी। 13 साल की उम्र में वह केंद्रीय हिंदू स्कूल में शामिल होने के लिए वाराणसी चले गए और बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भाग लिया, जहां उन्होंने चिकित्सा का अध्ययन किया। कॉलेज में अनजान घटनाओं की श्रृंखला ने उन्हें स्कूल से बाहर निकलने और इसके बजाय काम की तलाश करने का नेतृत्व किया।

करियर और राजनीति 

राय ने एक ठेकेदार के रूप में काम करना शुरू किया और वाराणसी में एक प्रसिद्ध निर्माता बन गया। उनके प्रारंभिक कार्य में सरकारी वित्त पोषित सड़कों और पुलों शामिल थे लेकिन बाद में वे आवासीय भवनों के निर्माण की ओर बढ़ गए।

कुछ आकांक्षाएं और मनोज सिन्हा के करीबी निकटता उनके लिए राजनीति में शामिल होने के लिए प्रारंभिक जोर थीं। उन्होंने हिंदू भावनाओं को बढ़ावा दिया और तथ्य यह है कि वह जाति द्वारा भुमहार थे, उनके प्रभाव में वृद्धि हुई। 2002 में, वह गाजीपुर के मोहम्मदबाद निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए चुने गए थे। वहां वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य थे । [1] 2017 में, उनकी पत्नी, अल्का राय ने मोहम्मदबाद से विधानसभा सीट जीती।

हत्या 

बसवानी में एक स्मारक राय और अन्य की मौत हो गई।

राई की हत्या 2 9 नवंबर, 2005 को हुई थी, जबकि अपने मूल गांव में पारिवारिक शादी में भाग लिया था। [2] उन्हें विशेष टास्क फोर्स के अधिकारियों द्वारा मौत की धमकी के बारे में पता चला था, जिन्होंने स्थानीय राजनेता और पूर्व गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के निवास पर किराए पर हत्यारों को चेतावनी दी थी। उन्हें सियारी में क्रिकेट मैच शुरू करने के लिए मजबूर किया गया था और उन्हें बुलेट प्रूफ वाहन या गार्ड का उपयोग न करने के लिए राजी किया गया था। उन्हें एके -47 राइफल्स का इस्तेमाल करने वाले हमलावरों ने घर वापस अपने रास्ते पर हमला किया था। कुल मिलाकर सात लोग मारे गए। 

इस हत्या ने इस क्षेत्र में अपमान पैदा किया। अटल बिहारी वाजपेयी , लालकृष्ण आडवाणी , राजनाथ सिंह , कल्याण सिंह और मनोज सिन्हा जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने सीबीआई जांच की मांग की लेकिन सरकार ने शुरुआत में दोषी होने के डर के लिए अपनी कॉल को खारिज कर दिया। मुख्तार और अफजल अंसारी के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट दायर की गई थी लेकिन जांच के लिए नियुक्त पुलिस अधीक्षक भजन राम मीना ने मामले को छोड़ दिया था। उन्होंने अनावश्यक दबाव का आरोप लगाया और सीबीसीआईडी ​​को स्थानांतरित करने के लिए कहा। छह महीने के बाद, सीबीसीआईडी ​​ने इस मामले को आत्मसमर्पण कर दिया, दबाव की शिकायत की और मामले को स्थानीय पुलिस को हस्तांतरण की सिफारिश की। कोई उपाय नहीं ढूंढते, कृष्णनंद राय की पत्नी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपने पति की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की। अल्का राय द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका अंसारी भाइयों के खिलाफ तीस आपराधिक मामलों की जानकारी प्रदान करती है। [4] न्यायालय ने मई 2006 में सीबीआई जांच का आदेश दिया। [3]

अंसारी पर हत्या का आदेश देने का आरोप था और 2010 में आगरा जेल में रखा गया था। वह अप्रैल 2014 तक वहां रहता है लेकिन मुकदमा अभी तक नहीं हुआ है। [5] एक अन्य व्यक्ति ने हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया – अफ्रोज़, जिसे चुन्नू पहेलवान भी कहा जाता है – को जून 2014 में गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायिक हिरासत में रखा गया। [6]

गाजीपुर के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय व अन्य छह लोगों की हत्या के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने कृष्णानंद राय व अन्य लोगों की मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) पेश करने का निर्देश सीबीआई को दिया है।

मामले में आरोपी बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी ने मृतक कृष्णानंद राय व अन्य लोगों के मोबाइल की भी कॉल डिटेल मांगी थी।

तीस हजारी स्थित विशेष सीबीआई जज अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने कृष्णानंद राय, प्रेमचंद राय, रजनीश कुमार राय, संजीव राय व तत्कालीन सांसद मनोज शाह के मोबाइल की सीडीआर पेश करने का निर्देश दिया है।

मुख्तार अंसारी ने की थी ये डिमांड

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अदालत ने मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी के मोबाइल की सीडीआर भी पेश करने का निर्देश सीबीआई को दिया है।

दूसरी ओर अदालत ने राम नारायण राय, बृजेश राय, मनोज कुमार राय, रामकिरत सिंह, अंजनि कुमार राय व नंदरा जोगा के मोबाइल नंबरों का विवरण न दिए जाने के कारण इनकी सीडीआर मंगाने से इनकार कर दिया है।

अदालत में आवेदन दायर कर मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय, अफजल अंसारी, यूपी के चैनल की फुटेज, अखबार का इंटरव्यू व अफरोज उर्फ चुन्नू से पूछताछ की नकल उपलब्ध कराने की मांग की थी। सीबीआई ने चार्जशीट में कहा था कि विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद आरोपी मुख्तार अंसारी ने अभय सिंह से मोबाइल पर बात की थी।

मोबाइल में छिपे हैं कई राज!

सीबीआई का यह भी आरोप था कि कृष्णानंद हत्या की साजिश मुख्तार अंसारी व अफजल अंसारी ने गाजीपुर कोर्ट में 25 अक्टूबर 2005 को सरेंडर के दौरान रची थी। उन्हें साजिश रचते हुए प्रेम चंद राय, रजनीश कुमार राय व संजीव राय ने सुना था।

बचाव पक्ष का कहना था कि जिस दिन मुख्तार अंसारी ने कोर्ट में सरेंडर किया यह तीनों गवाह वहां से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर थे और यह बात मोबाइल लोकेशन से साबित हो सकती है।

दूसरी ओर जब मुख्तार अंसारी व अभय सिंह के बीच मोबाइल पर बातचीत रिकॉर्ड की गई उससे पहले ही न्यूज चैनल पर प्रसारित हो चुकी थी और उसके बारे में पूरी दुनिया जानती थी। हत्या के बाद भी विधायक कृष्णानंद राय का मोबाइल कई दिनों तक इस्तेमाल होता रहा था जबकि यह मौके से बरामद किया जाना चाहिए था।

ये है पूरा मामला

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मामले के अनुसार भाजपा विधायक राय व अन्य छह लोगों की गाजीपुर जिले के भंवरकौल थाना इलाके के गंधौर में 29 नवंबर 2005 को हत्या कर दी गई थी।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले में पांच अभियुक्तों एजाज उर्फ एजाज उल हक, अफजल अंसारी, मुन्ना बजरंगी, फिरदौस उर्फ जावेद व अता उर रहमान के खिलाफ 21 फरवरी 2006 को आरोप पत्र दाखिल किया था।

पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने से पहले एजाज व अफजल अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन मुन्ना बजरंगी, फिरदौस व अता उर रहमान को गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। मृतक विधायक की पत्नी अलका राय की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई गाजीपुर से दिल्ली ट्रांसफर कर दी थी।

मुन्ना बजरंगी की हत्या: पुलिस को सुनील राठी गिरोह पर शक

उत्तर प्रदेश में सोमवार को बागपत जिले की जेल में कुख्यात डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस वारदात के बाद जेल प्रशासन से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। लखनऊ में राज्य के पुलिस उपमहानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) प्रवीन कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में हत्या में कुख्यात अपराधी सुनील राठी गिरोह के बदमाशों का नाम सामने आया है।

 

बताया जा रहा है कि मुन्ना बजरंगी पर सुबह 6 बजे हमला हुआ। हमले के बाद बजरंगी की मौत हो गई।

फायरिंग के बाद जेल में हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मी ओर बंदी रक्षक मौके पर पहुंचे और अफसरों को इसकी सूचना दी। करीब दो घंटे बाद डीएम एसपी जेल पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करन के निदेर्श देते हुए घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। जांच बागपत के सिटी मजिस्ट्रेट करेंगे। इस घटना के सिलसिले में बागपत जेल के जेलर, डिप्टी जेलर सहित चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया हैं।

बागपत के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश ने बताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता एवं पूर्व  विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत अदालत में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। मुन्ना बजरंगी को कल रात ही झांसी जेल से बागपत लाया गया था। जेल में ही सुबह छह बजे साथी कैदी ने उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

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