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Uttar Pradesh

घुसपैठियों को रोकने में ढोकलाम बार्डर पर शहीद राणा

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मुरादाबाद,

जनपद के मूंढापांडे के गांव घोसीपुरा के रहने वाले राजेंद्र सिंह राणा पुत्र बिट्टा सिंह सेना में 1989 में भर्ती होकर जूनियर कमीशन ऑफिसर के तौर पर काम शुरू किया। सिक्किम के बार्डर पर उन्हें तैनाती मिलनी थी। सिक्किम के ढोकलाम में 25 अप्रैल 2011 को घुसपैठ हुई। हेलीकाप्टर से वरिष्ठ तीन अधिकारी और राजेंद्र सिंह राणा छातन केला की युमथान वैली के लिए निकले। घुसपैठियों को रोकने के लिए फौजियों ने गोलीबारी की थी। कुछ घंटों तक तो संपर्क होता रहा, लेकिन उसके बाद संपर्क टूट गया। दो दिन बाद चार हेलीकाप्टरों से सेना के जवान उन्हें देखने के लिए निकले। 27 अप्रैल 2011 को चारों फौजियों के शव और एक ओर हेलीकाप्टर पड़ा मिला। सैन्य कार्यालय से परिवार को खबर मिली तो गांव में सन्नाटा पसर गया था। फौजी को शहीद का दर्जा मिला लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं।

राणा को याद कर स्मारक को किया रोशन

फौजी को शहीद का दर्जा मिलने के बाद परिजनों के साथ साथ स्थानीय गांव के लोगों के अलावा देश भी अब प्रतिवर्ष शहीद को नमन करता है। दैनिक जागरण के एक दीया शहीदों के नाम कार्यक्रम के तहत शनिवार को मूंढापांडे के घोसीपुरा गांव में शहीद राजेंद्र सिंह राणा को याद कर स्मारक को रोशन किया। परिवार के साथ गणमान्य लोगों ने खुशियां बांटीं।

परिवार ने खुद बनाया शहीद स्मारक

जिला प्रशासन ने कोई स्मृति चिन्ह के तौर पर सड़क, द्वार नहीं बनाया। परिवार के लोगों ने निजी स्थान पर ही चबूतरा बनवा दिया है। जहां हर साल दीये जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। शनिवार को पूर्व प्रधान गोविंद प्रसाद सैनी, कुंवर पाल सिंह, नरेश प्रताप सिंह, मां ओमवती कुंवर, भाई सुरेश पाल सिंह, चंद्रपाल सिंह, जितेंद्र पाल सिंह ने दीये जलाने पहुंचे तो परिवार की आंखों भर आईं।

बच्चों की हो रही आर्मी स्कूल में पढ़ाई

पत्नी कल्पना राणा ने पति की शहादत के बाद बच्चों को भी मजबूत इरादों वाला बनाया है। उनमें देशभक्ति के लिए पिता की वीरगाथा प्रतिदिन सुनाती हैं। बेटा शिवांक प्रताप राणा, बेटी तनिष्का राणा बंगलौर के आर्मी स्कूल में पढ़ रहे हैं।

शहीद फौजी के नाम पर जिला प्रशासन ने गांव या उसके आसपास कोई स्मारक तक नहीं बनवाया है। सरकारी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। भाई नरेश प्रताप सिंह ने बताया कि देश पर मर मिटने वालों के परिवार के लिए जिला प्रशासन के पास कुछ नहीं है। कई बार पत्राचार भी किया गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।

म सब मिलकर जलाएं शहीदों के नाम का दीया

मुरादाबाद : ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा राम प्रसाद बिस्मिल की यह पंक्तियां आज भी साकार होती हैं। दैनिक जागरण हर साल शहीदों नाम पर दीया जलाकर उनका स्मरण करता है। नागरिकों को देश के लिए जान देने वाले शहीदों से जुड़कर, गौरव का अहसास करने का अवसर प्रदान करता है। 30 अक्टूबर को सोनकपुर स्टेडियम में शाम 4:30 बजे एक बार फिर से यह मेला लगने जा रहा है। इसमें आप शामिल होकर शहीदों के नाम से दीया जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि देकर राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभा सकते हैं।

एक दीया शहीदों के नाम कार्यक्रम शानदार पहल

देश के लिए शहादत देने वाले वीर जवानों को अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि देने के लिए दैनिक जागरण का एक दीया शहीदों के नाम कार्यक्रम शानदार पहल है। यह समाज के लिए संदेश है, साथ ही इससे हमारे नौजवानों को भी प्रेरणादायी देता है। आओ हम सब मिलकर वीर जवानों की याद में एक दीया जरूर चलाए। जे. रविन्दर गौड, एसएसपी

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