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Jaunpur

जौनपुर : पन्द्रह दिन की मांगी थी मोहलत , दो साल बाद भी पूरी नही हो सकी जांच

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कालेज मे ब्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे सेवा निबृत्त शिक्षक

मुंगराबादशाहपुर/जौनपुर :- मुंगराबादशाहपुर स्थित हिन्दू इण्टर कालेज मे ब्याप्त भ्रष्टाचार ,नियम बिरूद्ध कार्यो ,प्रबन्धकीय चुनाव सहित 17 सूत्रीय मांग को लेकर सेवा निबृत्त शिक्षक द्वारा बीते 27 जुलाई 2016 मे आमरण पर बैठने के पश्चात हरकत मे आये जिला प्रशासन के निर्देश पर नायब तहसीलदार संतोष कुमार शुक्ल द्वारा 15 दिन की मोहलत मांगने पर शिक्षक द्वारा आमरण अनशन तोड़ने वाले शिक्षक की मांगो की जांच दो साल की अवधि  बीत जाने के बाद भी प्रशासन जांच नही कर सका | जिसे लेकर सेवा निबृत्त शिक्षक रमा शंकर शुक्ल ने कालेज को भ्रष्टाचार मुक्त कराने का बीड़ा एक बार फिर उठाने का मन बना लिया है | बताते चले की कालेज मे ब्यापक पैमाने पर ब्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर सोहासा ग्राम निवासी सेवा

सेवा निबृत्त शिक्षक रमा शंकर शुक्ल ने जिला प्रशासन सहित सम्बन्धित उच्च अधिकारियो को सूचना भेज कर बीते 27 जुलाई 2016 को कालेज परिसर के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गये थे | जिसकी सूचना मिलते ही जिला  प्रशासन के हांथ पांव फूल गये थे | जिलाधिकारी के निर्देश पर अनशन स्थल पर पहुंचे नायब तहसीलदार मछलीशहर संतोष कुमार शुक्ल काफी जद्दोजहद के पश्चात शिकायतो का ज्ञापन लेते हुए 15 दिन के अन्दर जांच करा कर  न्याय दिलाने का आश्वासन देकर आमरण अनशन पर बैठे श्री शुक्ल को जूस पिला कर आमरण अनशन समाप्त कराकर सफलता हासिल कर ली थी | लेकिन 15 दिन के अन्दर जांच कराकर न्याय दिलाना तो दूर वे 743 दिन अर्थात 2 वर्ष 13 दिन बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नही करा सके | इसके पीछे क्या रहस्य है ,नायब तहसीलदार के सामने जांच के दौरान कौन सा पहाड़ आड़े आ गया अथवा उनकी कौन सी कमजोर नस पर  भ्रष्टाचारियो ने ऊंगली रख दी | यह तो वखूबी वही बता सकते है | बकौल रमा शंकर शुक्ल भ्रष्टाचारियो के चांदी का जूता नायब तहसीलदार के  सिर पर पड़ते ही उन्हे अपना ही दिये गये आश्वासन के समय को  भूलने के लिए बिवश होकर 17 सूत्रीय  ज्ञापन की पत्रावलूी को ठंढे बस्ते मे रखने को मजबूर कर दिया | सेवा निबृत्त शिक्षक रमा शंकर शुक्ल ने इस संबाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि आमरण अनशन तोड़ते समय मैने यह घोषणा कर दी थी कि यदि जांच निष्पक्ष नही की गयी व न्याय नही किया गया तो दुबारा आमरण अनशन पर बैठने से कोई रोक नही पायेगा | उन्होने बताया की संस्थापक स्व ० यमुना प्रसाद गुुप्त द्वारा रोपित इस सरस्वती  के मंदिर को प्रबन्ध समिति के जिम्मेदार लोगो द्वारा ब्यावसायिक केन्द्र बना दिया गया है | प्रबन्ध समिति के जिम्मेदार लोग जहां  शिक्षको से बंधी बंधायी माहवारी रकम लेकर उन्हे घर बैठे पूरा वेतन देकर  जहां सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है वही कालेज मे छात्रो के पठन पाठन हेतु बनायी गयी कक्षाओ को किराये पर बांटा जा रहा है | जिसकी जानकारी होने के बावजूद जिले के अधिकारी मूक दर्शक बने है | जिसे अब बर्दास्त नही किया जा सकता | जिस पर यदि जिला प्रशासन द्वारा  शीघ्र कोई सार्थक प्रयास नही किया गया तो मुझे पुनः 27 जुलाई 2016 की तरह आमरण अनशन करने को बिवश होना पड़ेगा | जिसकी जम्मेदारी भी जिला प्रशासन की होगी तथा अब की बार होने वाला आमरण अनशन आर पार का होगा | या तो कालेज भ्रष्टाचार से मुक्त होगा या तो आमरण अनशन स्थल से मेरी लाश उठेगी | फिलहाल उक्त कालेज मे ब्याप्त भ्रष्टाचार का  प्रकरण पूरी तरह सुर्खियो मे आ गया है |

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