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Jaunpur

जौनपुर : परमार्थ दृष्टि से कौन स्वामी और कौन सेवक – पंडित ओमकारनाथ

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जलालपुर/जौनपुर :- क्षेत्र के छातीडीह गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में गुरू जी ने कहा कि दृष्टि दोष से बचा जाए तो सारे दुर्गुणों से बचा जा सकता है। सौबीर नरेश तत्वज्ञान की मीमांसा के लिए भगवान कपिल देव के आश्रम पर जा रहे थे वही संयोग से सौबीर नरेश का एक कहार बीमार पड़ गया। सेवक बृंद भाव प्रत्यय महात्मा जड़ भरत का अवधूतावेश में इक्षुमति नदी के किनारे विचरण करना एवं राजा के व्यंग्यात्मक शब्दों से उत्तर देना आदि प्रसंग भागवत कृपा से मिलती है। उक्त प्रसंग संतों की महती कृपा को रेखांकित करती है। भरत के आत्मीय ज्ञान को बताते हुए उन्होंने कहा कि संसार में जितने भी संबंध हैं सब स्वार्थ पूर्ण है अनुराग रखना धोखा है सांसारिक यात्रा भरी है क्रोध मोह इत्यादि से मनुष्य ग्रसित न हो भागवत कथा हमें यही सतर्क करती है। हिरण्यकश्यप का अत्याचार प्रह्लाद का विश्वास धुंधकारी एवं गोकर्ण के पावन कथा का आध्यात्मिक वर्णन करते हुए कहा कि थलचर प्राणी अपने धर्म नीति को छोड़कर जलचर विषय गामी बनेगा तो उसे गज की तरह कोई संबंधी साथ नहीं देगा। अपने में रहोगे तो हितकर रहेगा बाहर गए तो पराभाव प्राप्त करोगे । मनुष्य को भागवत यही सावधान करता है। इस अवसर पर पं. विनय मिश्र , पं. वीरेंद्र शुक्ल ,पं. अवनीश दुबे ,संतोष जी वैदिक , प्रबंधक डॉ अजयेन्द्र कुमार दुबे , विजेंद्र दुबे ,भूषण मिश्र ,रामसुमेर , दशरथ मिश्र , दयानारायण मिश्र , करुणा शंकर, शिवानंद शुक्ल ,अनिल कुमार, विद्यानिवास , अश्वनी कुमार , संतोष ,शुभम ,सत्यम श्रीमती विमला देवी ,जड़ावती देवी आदि प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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