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जौनपुर-मानक के विपरीत धनबल से ली गयी मान्यता

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विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से चल रहे हैं विद्यालय ।

जौनपुर/उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश की प्रबुद्ध वर्ग को लगने लगा था कि भाजपा नीत सरकार में कोई सुधार हो या न हो ,शिक्षा विभाग में सुधार अवश्य होगा ।क्योंकि जनता ने कल्याण सिंह की सरकार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री व वर्तमान में देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह की शिक्षा नीति
को लोगो ने देखा था ।किंतु अफसोस और दुर्भाग्य यह है कि योगी सरकार में जहां प्राथमिक शिक्षा के सुधार के लिए नित नए प्रयोग किये
जा रहे है ,वही जौनपुर जनपद जो प्रदेश ही नही देश मे भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है ।आज यह जनपद प्राथमिक
शिक्षा के मामले में भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है ।

बात करते है बरसठी विकास खंड के प्राइवेट प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों की । आज बरसठी के हर बाजार ,नुक्कड़ ,तिराहे ,चौराहे पर प्राइवेट विद्यालयों के आकर्षक बैनर ,पोस्टर लगाकर अप्रशिक्षित
अध्यापको के माध्यम से अभिभावकों को किताब ,कापी ,टाई ,बेल्ट,तथा एडमिशन फीस के नाम पर शिक्षा अधिकारियों के नजर
के सामने लूटकर देश के छोटे छोटे नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जिसमे बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मौन स्वीकृति प्राप्त है ।

बरसठी में लगभग 123 प्राथमिक ,नर्सरी ,और जूनियर प्राइवेट विद्यालयों को विकास खंड स्तर से लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा मान्यता प्रदान की गई है ।शिक्षा अधिकार अधिनियम
में स्पष्ट शासनादेश है कि प्राइवेट विद्यालयों को तभी मान्यता दी जाए,
जब वह मान्यता की सभी शर्तो को पूरा करते हों ।खंड शिक्षा अधिकारी स्वयं मान्यता के लिए पत्रावली प्रस्तुत करने वाले विद्यालयों
का भौतिक निरीक्षण कर ,विद्यालय के स्थलीय सत्यापन के दौरान मानक पूर्ण होने पर ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को मान्यता हेतु
अपनी संस्तुति भेजें ।किन्तु बरसठी में शिक्षा अधिकार अधिनियम के
इस आदेश की बेखौफ होकर शिक्षा अधिकारियों द्वारा धज्जियां उड़ाई
गयी है।
शासनादेश में एक अहम आदेश यह भी है कि यदि कोई विद्यालय कुछ
मानकों को पूर्ण नही कर पा रहा है तो उसे इस शर्त के साथ मान्यता निर्गत की जा सकती है कि को अगले तीन वर्षों में सभी मानकों को पूर्ण
कर ले ।तीन वर्ष बाद खंड शिक्षा अधिकारी ऐसे विद्यालयों का पुनः स्थलीय निरीक्षण कर उच्च अधिकारियों को अपनी आख्या स्थायी मान्यता के लिए भेजें और यदि मान्यता का मानक तीन वर्ष में पूर्ण नही
किया गया है तो ऐसे विद्यालयों की मान्यता निरस्त करने की संस्तुति
उच्चाधिकारियों को भेजें ।लेकिन बरसठी के नब्बे प्रतिशत प्राइवेट विद्यालय बिना किसी डर भय के बिना मानक पूर्ण किये ही धनबल
से मान्यता लेकर निरंतर विद्यालय चला रहे हैं ।
बेसिक शिक्षा विभाग लिए दुधारू के गाय हैं प्राइवेट विद्यालय ।
ब्लॉक से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों के लिए ऐसे बिना मानक के चल रहे प्राइवेट विद्यालय कामधेनू गाय बने हुए है ।जिनसे नियमित हर महीने अच्छी खासी वसूली की जाती है और वसूले गए धन की बंदर बांट की जाती है।
जौनपुर में कई ऐसा विद्यालय है जिसकी दो दो शाखाएं बरसठी में चल रही है ।एक मियां चक पर दूसरी राजापुर परियत में ।इस विद्यालय को तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी और ए बी आर सी की कृपा से एक ही तिथि में में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पत्रांक संख्या 10908 /15- 16 दिनांक 26 ,12 ,2015 को नर्सरी से कक्षा 5 तक के लिए मियां चक तथा 10900 2015- 16 दिनांक 26 /12/15 को राजापुर परियत को बिना कोई मानक पूर्ण के ही आंख मूंदकर मान्यता
निर्गत कर दी गयी । सबसे हास्यास्पद यह है कि शिक्षा माफिया ने शिक्षा अधिकारियों ,कार्यालय के बाबूओं की मिली भगत से ठीक पांच माह
बाद पत्रांक संख्या 1426/ 2016-17 दिनांक 28 /5/2017 को पुनः मियां चक वाले विद्यालय की नर्सरी से कक्षा 8 तक की मान्यता बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा निर्गत कर दी गयी ,जो नियम विरुद्ध है।
जब एक बार विद्यालय को नर्सरी से पांच तक कि मान्यता निर्गत की गई तो उसी विद्यालय को पुनः पांच महीने बाद नर्सरी से आठ तक कि मान्यता कैसे निर्गत की जा सकती है ।यदि ईमानदारी ,निष्पक्षता और
बिना किसी दबाव के जांच हुई तो मान्यता को निरस्त कर संबंधित
अधिकारियों ,विद्यालय संचालक जो फर्जी दस्तावेज के आधार पर सभी नियम व शर्तों की धज्जियां उड़ाते हुए मान्यता आहरित कराई है,
सभी के विरुद्ध प्राथमिकी सक्षम अधिकारियों द्वारा दर्ज कराई जानी चाहिए किन्तु कच्छप गति से हो रही जांच को देखकर ऐसा कुछ भी होता प्रतीत नही हो रहा है ।और उसी विद्यालय को ही क्यों ,बरसठी में
बिना मानक के ही अधिकारियों की कृपा से धनबल के सहारे फर्जी दस्तावेज के सहारे मान्यता लेकर विद्यालय चला रहे सभी विद्यालयों की जांच होनी चाहिए और जिन विद्यालयों की मान्यता मानक अभी तक पूर्ण नही है तत्काल उनकी मान्यता निरस्त कर उनकी दुकानों
को बंद कराना चाहिए जो अप्रशिक्षित अध्यापक ,अध्यापिकाओं से पढ़वाकर आधी अधूरी जानकारी देकर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है । ऐसे संचालकों को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अक्सर ससम्मान बैठे देखा जा सकता है ।वह खुद मलाई काट रहे है और साहबान तथा बाबुओ को भी हर महीने तय हिस्सा पहुंचा रहे है ।यदि ऐसा न होता तो सब कुछ
जानते हुए भी जिम्मेदार आंख मूंदे रहते।पूरे बरसठी में ही नही जनपद
के वरिष्ठ जिम्मेदारों से लेकर प्रदेश स्तर तक बरसठी के उक्त विद्यालय का मामला पिछले कुछ दिनों से धूम मचाए हुए है क्योंकि विद्यालय संचालक द्वारा सोसल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल किया जा रहा था जिसमे एक कर्मचारी द्वारा पत्रकारों और जिला स्तर के अधिकारियों के नाम पर मोटी रकम की मांग की जा रही है ।इससे इस
विद्यालय की निष्पक्ष जांच ,जांच के आधार पर की गई कार्यवाही और
खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला स्तर के विभागीय अधिकारियों की ईमानदारी पर सभी की निगाहें टिकी हुई है ।देखना है कि विभागीय
नियमों की जीत होती है कि धनबल के माध्यम से शिक्षा माफिया एक बार पुनः विभाग पर भारी पड़ता है।

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