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Jaunpur

जौनपुर : संरक्षक मण्डल ने ली त्योहार सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी, जन सहयोग की अपील

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पखवारे भर से अध्यक्ष को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लगाने का प्रयास

शाहगंज/जौनपुर :-  श्रीराम लीला समिति में पखवारेभर से अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे विवाद को समाप्त कराने के प्रयास में समिति के संरक्षक मण्डल ने बैठक करके कार्यवाहक अध्यक्ष को हटाते हुए स्वयं रामलीला मंचन, दशहरा एवं भरत मिलाप सम्पन्न कराने का निर्णय लिया। हालांकि सात लोगों के संरक्षक कमेटी में छह संरक्षकों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये। जबकि संरक्षक त्रिभुवन मोदनवाल बैठक से चले गये।

बुधवार की दोपहर समिति के संरक्षक व पूर्व चेयरमैन ओमप्रकाश जायसवाल के आवास पर आयोजित बैठक में संरक्षक मण्डल द्वारा निर्णय लिया गया कि त्योहार करीब होने व अध्यक्ष पद को लेकर भ्रम की स्थित होने पर संरक्षक मण्डल स्वयं त्योहारों को सम्पन्न कराएगा। त्योहार बीतने के बाद पुनः बैठक में संविधान समिति बनाकर संवैधानिक रुप से अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न कराया जाएगा। बैठक में ओमप्रकाश जायसवाल ने नगर की एकता एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम रखने व रामलीला में नागरिकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने उत्पन्न विवाद को हल कराने के प्रयास में लगे पूर्व अध्यक्ष मनोज अग्रहरि व वरिष्ठ कार्यकर्ता शेखर मोदनवाल की सराहना की। सकुशल मेला सम्पन्न कराने के लिए संरक्षक मण्डल ने प्रशासन के सहयोग के लिए उच्चाधिकारियों को पत्रक भी दिया।

बताते चलें कि रामलीला समिति में अध्यक्ष के चुनाव को लेकर आयोजित खुली बैठक में दो दावेदार के समर्थकों के बीच हंगामा होने पर बैठक स्थगित की गयी थी। दूसरे दिन संरक्षक मण्डल द्वारा वरिष्ठ कार्यकर्ता घनश्याम जायसवाल को एक वर्ष के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत किया। जिसपर लोगों के बीच नाराज़गी बढ़ी। पुनः खुली बैठक में श्रीश मोदनवाल को अध्यक्ष चुना गया। इसके दूसरे दिन आयोजित बैठक में समिति कई टुकड़ों में बंटती नजर आई। एक पक्ष जहां श्रीश मोदनवाल को अध्यक्ष माना वहीं दूसरे पक्ष ने अपना अध्यक्ष विकास जायसवाल को चुन लिया। मामले का हल निकालने के लिए पुनः बुलाई गयी बैठक में पूर्व चेयरमैन जितेन्द्र सिंह को अध्यक्ष व पूर्व चेयरमैन जयप्रकाश गुप्त को महामंत्री बनाया गया। जिसपर जितेन्द्र सिंह अपने समर्थकों के साथ रामलीला भवन पहुंचे। चार्ज न मिलने पर उन्होने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर चार्ज दिलाने की मांग की। समिति में बढ़ते गतिरोध व आपसी मतभेद को देखते हुए संरक्षक मण्डल के सात सदस्यों में ओमप्रकाश जायसवाल, लालचंद विश्वकर्मा, सुनील जायसवाल, श्यामजी गुप्त, जवाहिरलाल अग्रहरि, अनिल मोदनवाल ने स्वयं मेला सम्पन्न कराने का निर्णय लिया।

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