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#जौनपुर: सत्ताधीशों को राश नहीं आता ईमानदार पुलिस अफसर

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(ब्यूरो-रिपोर्ट)
जौनपुर/पुलिस अधीक्षक के.के चौधरी का तबादला हुआ नहीं कि ट्रांन्सफर कराने की शोहरत लेने की होड़ मच गई। नेताओं से लेकर दलालों तक ने अपनी पीठ ठोंकी। पिछले दशक में जो स्थिती पुलिस महकमें की रही है, के.के चौधरी ने नौ महीनें के कार्यकाल में उसे बदलनें की ईमानदार कोशिश की है। जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कारण बहुत थोड़े ही समय में पुलिस महकमा और पुलिस को अपना निजी चाकर मानने वाले सत्ताशाह दोनों ही परेशान हो गये, लिहाजा उनका तबादला कर दिया गया।

अकेले के.के चौधरी ही थे जिन्होंने समझा-बुझाकर, डांट-फटकार कर अपनी पुलिसियां मशीनरी को ठीक बना रखने का प्रयास किया था। अपने नौ माह के कार्यकाल के दौरान खाकी वार्दी, की गुण्डागर्दी तथा अपराध और अपराधियों को समाप्त करने का अभियान चला दिया था। जिससे क्षेत्र में आम जनता के लिए अमन-चैन किन्तु पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली से नेता परेशान, पुलिस हलकान जैसी स्थति बन गई थी। जिले में अपराधियों, दादा किस्म के लोगों, थाना-चौकी के दलालों और भ्रष्ट व रिश्वतखोर, छोटे बड़े जन प्रतिनिधियों को फूटी आँख न सुहाने वाले इस पुलिस अफसर का स्थानांतरण जनता के लिए तो बेहद तकलीफदेह है किन्तु जिनका काला धंधा बन्द हो गया था वे आज परम प्रसंन्न और सत्ताधीशों को धन्यवाद दे रहें हैं। जिले में जन प्रतिनिधियों को ईमानदार पुलिस अफसर राश नहीं आ रहें हैं। यही कारण है कि जनपद में ईमानदार पुलिस अफसर का तबादला कराना जनप्रतिनिधियों के लिए अब आम बात हो गई है। निहित स्वार्थाें जैसे ट्रान्सफर, पो​स्टिंग, विवेचना, जमीन कब्जा, विरो​धियों पर फर्जी मुकदमें के लिए बलि चढ़ाना इनके फितरत में शामिल रहा है। जिले के साहित्यसेवी, प्रबुद्धजन, अधिवक्ता, पत्रकार, आम जनता सभी इस तबादले से मर्माहत हैं कि अब ईमानदारी से जनता की सुनने वाला पुलिस अफसर जिले में नहीं हैं।

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