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दुर्लभ नीले हीरे में छिपा पृथ्वी का रहस्य, जिससे अभी तक सभी थे अनजान

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नई दिल्ली । दुनिया के सबसे कीमती और दुर्लभ रत्नों में से एक नीले रंग के हीरे में पृथ्वी का वो गहरा रहस्य छुपा है, जिससे अभी तक सभी अनजान थे। जिस तरीके से इस नीले हीरे के निर्माण की प्रक्रिया हैरान करने वाली है, उसी तरह इसका इतिहास भी रोचक है।

ये दुर्लभ नीला हीरा तमाम राजाओं, बैंकरों, उत्तराधिकारियों और चोरों के हाथों से होता हुआ अब वॉशिंगटन के संग्रहालय तक पहुंचा है। असाधारण, दुर्लभ और कीमती रत्नों के बारे में जनरल नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट में दुर्लभ नीले हीरे का भूवैज्ञानिक इतिहास पता चला जो धरती के अंदर मौजूद कई रहस्यों से पर्दा उठाता है और किसी को भी हैरान कर सकता है।

नीलाम होने वाला सबसे महंगा रत्न

नीला हीरा दुनिया का सबसे कीमती रत्नों में से एक था। इसकी नीलामी 2016 में दक्षिण अफ्रीका में 2.5 करोड़ डॉलर में हुई थी। ये उस समय सबसे ज्यादा कीमत में नीलाम होने वाला रत्न था।

लोअर मैंटल में बनते हैं नीले हीरे

46 नीले हीरों पर किए अध्ययन के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इनका विकास धरती में 660 किमी गहराई में होता है। छोटे खनिज टुकड़े पृथ्वी के इस हिस्से में रह जाते हैं और यहीं से नीले हीरों का जीवन शुरू होता है। हालांकि खनन में निकलने वाले दुनिया के दुर्लभ हीरों में सिर्फ 0.02 फीसद ही नीले रंग के होते हैं।

ऐसे बनते हैं नीले हीरे

शोधकर्ताओं ने बताया कि हीरा कार्बन का क्रिस्टल रूप होता है। यह पृथ्वी के अंदर एक निश्चित दबाव और ऊष्मा पर विकसित होता है। नीले हीरे में पानी वाले वो खनिज होते हैं, जो कभी समुद्री शैवाल थे। ये पृथ्वी की सतह को आकार देने वाली विशाल प्लेटों से टकराकर गहराई में चले गए बोरॉन से मिलता है नीला रंग बोरॉन तत्व से नीले हीरे को चमकीला नीला रंग मिलता है। अध्ययन में पता चला कि समुद्री जल में लगभग 4-5 पीपीएम बोरॉन होता है। ये बोरॉन पानी में घुला हुआ होता है।

पहली बार पता चली निर्माण प्रक्रिया रिपोर्ट में नीले हीरे के बनने की प्रक्रिया पहली बार सामने आई है। जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका के वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे पहले दुनियाभर में नीले हीरे के बारे में सिर्फ इतना पता था कि ये दुर्लभ और कीमती है।

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