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LUCKNOW

देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य 16 दिन से कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे

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लखनऊ । सुलखान सिंह के 31 दिसंबर 2017 को सेवानिवृत होने के बाद से आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य बिना पुलिस महानिदेशक के है। आनंद कुमार 31 जनवरी से ही सूबे में कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्य कर रहे हैं। एक जनवरी को ही उत्तर प्रदेश कॉडर के आइपीएस अधिकारी सीआइएसएफ के डीजी ओपी सिंह का नाम डीजीपी उत्तर प्रदेश के लिए तय भी हो गया, लेकिन उन्होंने तब से काम नहीं संभाला है।

आनंद कुमार को जुलाई के पहले हफ्ते में अपर महानिदेशक कानून-व्यवस्था के पद पर कार्य दिया गया। उसके बाद एक जनवरी से वह अभी तक कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक की भूमिका में हैं। उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड आर्डर के पद पर आनंद कुमार को जुलाई के पहले हफ्ते में तैनात किया गया था। उनको आदित्य मिश्रा के स्थान पर इस पद पर लाया गया था। पटना निवासी आनंद कुमार 1988 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं।

बीती सरकार के समय से ही खराब प्रदेश की कानून-व्यवस्था को योगी आदित्यनाथ सरकार पटरी पर लाने के प्रयास में भले ही है, लेकिन जब तक पुलिस प्रमुख का कार्यभार ओपी सिंह नहीं संभालते हैं, तब तक तो कोई भी बड़ा निर्णय होना फिलहाल संभव नहीं लग रा है। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद ओपी सिंह 15 जनवरी को अपना पद संभाल लेंगे, लेकिन अभी तक कोई भी सुगबुगाहट नहीं हो रही है। उत्तर प्रदेश में अब भी पुलिस मुखिया का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। केंद्र से ओपी सिंह को 16 दिन बाद भी रिलीव नहीं किया गया है। अब राज्य सरकार का यह निर्णय उनके ही गले की फांस बनता नजर आ रहा है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात ओपी सिंह 1983 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं। डीजीपी के पद पर नियुक्ति के 16 दिन बाद भी वह पदभार ग्रहण नहीं कर सके हैं। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय को उन्हें डीजीपी बनाने का प्रस्ताव 30 दिसंबर को ही भेजा था। डीजी सीआइएसएफ के पद पर तैनात ओपी सिंह को अब तक केंद्र सरकार ने रिलीव नहीं किया है। इस वजह से अभी तक देश के सबसे बड़े राज्य के पुलिस प्रमुख की कुर्सी पखवारे भर से खाली है। महकमे में असमंजस की स्थिति और गहराती जा रही है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े पुलिस विभाग यानी उत्तर प्रदेश पुलिस को पहली बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है।

ओपी सिंह को रिलीव किए जाने का मामला कहां अटका है, इसे लेकर गृह विभाग व प्रशासनिक अमले से लेकर अब तो पुलिस महकमे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राज्य सरकार पर भी अपने पसंदीदा पुलिस प्रमुख को अब तक केंद्र से अवमुक्त न करा पाने को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। इस बीच कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के पुलिस मुखिया बनाए जाने पर भी विचार की चर्चाएं हैं। कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तो एनेक्सी में पेशबंदी करते भी देखे गए। हालांकि गृह विभाग द्वारा अब तक केंद्र सरकार को कोई नया प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हैं। यह पहला मौका है, जब प्रदेश में डीजीपी की कुर्सी 15 दिनों से खाली है।

ओपी सिंह के पदभार ग्रहण करने को लेकर कई संभावित तिथियां घोषित की गईं, लेकिन सभी टलती गईं। तेजी से फैसले लेने के लिए जानी जाने वाली प्रदेश सरकार की भी इस मामले में किरकिरी हो रही है। अधिकारी लगातार कुछ तकनीकी कारणों के चलते ओपी सिंह के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से अवमुक्त होने में समय लगने की बात कह रहे थे। इस बीच केंद्र सरकार के डीओपीटी ने शनिवार व सोमवार को प्रतिनियुक्ति पर तैनात करीब दो दर्जन अधिकारियों को विभिन्न राज्यों के लिए रिलीव कर दिया। ऐसे में ओपी सिंह को अवमुक्त न करने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजनीतिक कारणों से लेकर प्रस्ताव भेजे जाने में प्रशानिक अधिकारियों से हुई चूक तक को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। वहीं, राज्य सरकार के लिए अपने इस फैसले को वापस लेना भी गले की फांस बनता नजर आ रहा है। केंद्र व प्रदेश में एक ही दल की सरकारें होने के बावजूद इस विषय पर सहमति न बन पाने को लेकर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ नए नामों पर मंथन शुरू हो गया है लेकिन, ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर पहले लिए गए निर्णय को बदलने के पीछे आधार क्या बताया जाएगा।

सीआईएसएफ मुख्यालय के प्रवक्ता हेमेंद्र सिंह ने बताया कि ओपी सिंह अभी भी सीआईएसएफ के महानिदेशक हैं। वह अभी अपने पद से मुक्त नहीं हुए हैं। इस मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक रहे अरविंद कुमार जैन कहते हैं कि ओपी सिंह को पदभार ग्रहण करने में ज्यादा वक्त लग रहा है, अमूमन ऐसा होता नहीं है। चूंकि वे केंद्र सरकार के अहम पुलिस बल के प्रमुख हैं, तो इस स्थिति में वहां वैकल्पिक व्यवस्था होने में वक्त लग रहा हो।

अरविंद जैन के मुताबिक यहां उत्तर प्रदेश सरकार से संभवत: एक चूक हुई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोशिश की होगी कि नए डीजीपी का नाम बाहर नहीं निकले। इस कोशिश में ओपी सिंह के नाम का ऐलान उसी दिन किया गया जिस दिन सुलखान सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा था। केंद्र सरकार से जिस तालमेल की जरूरत चाहिए, उसमें कमी रह गई होगी।

प्रदेश पुलिस के एक अन्य महानिदेशक रहे जगमोहन यादव कहते हैं कि सामान्य स्थिति में तो पुलिस व्यवस्था पर कोई असर नहीं होता लेकिन उत्तर प्रदेश देश का सूबा है, अचानक कोई आपात स्थिति हो तो पुलिस प्रमुख की भूमिका अहम हो जाती है। वैसे भी पुलिस एक तरह से यूनिफॉर्म और आर्मड फोर्स होती है, जो कमांडर के निर्देश पर ही काम करती है। अब 16 दिन से कमांडर ही नहीं है तो कोई भी बड़ा काम कैसे संभव है।

उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि नए डीजीपी ने अभी कार्यभार नहीं संभाला है। हमलोग इंतजार में हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि राज्य पुलिस को दिशा निर्देश देने के लिए कोई नहीं हैं। लॉ एंड ऑर्डर एडीजी आनंद कुमार इन-चार्ज डीजीपी की भूमिका संभाल रहे हैं। यूपी पुलिस की वेबसाइट पर पुलिस महानिदेशक के तौर पर ओम प्रकाश सिंह का नाम छप चुका है।

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