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बीजेपी ने लगाया राजद्रोह का केस तो बोला पत्रकार- सुन लो मोदी तुम कॉर्पोरेट के दलाल हो, नहीं डरूंगा-लिखता रहूंगा”

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छत्तीसगढ़ में एक पत्रकार के खिलाफ राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योकिं पत्रकार ने कोर्ट और सरकार के खिलाफ बने कथित कार्टून सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

पत्रकार कमल शुक्ला के खिलाफ कांकेर पुलिस थाने में राजद्रोह का केस दर्ज हुआ है। पुलिस का कहना है कि हमने राजस्थान के रहने वाले एक शख्स की शिकायत पर पत्रकार के खिलाफ धारा 124 ए (राजद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया है,अब इस मामले की जांच चल रही है और जल्द ही इसपर कार्यवाई की जाएगी।

दरअसल कमल शुक्ल भूमकाल के संपादक है जो पहले से छत्तीसगढ़ में होने फर्जी मुठभेड़ पर पहले से लिखते रहे है, इससे पहले बस्तर में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कानून की मांग करते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी रह चुके है। उन्होंने इस मामले पर सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए लिखा। जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योकिं कार्टून जज लोया की मौत पर बनाया गया था।

राष्ट्रद्रोह 124 (आ) मुझपर लगाया गया है। देश मे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किये जाने की साजिश पर अकेले मैने चिंता जाहिर नही की है बल्कि तमाम विपक्षी दलों सहित स्वस्थ लोकतंत्र पर विश्वास रखने वाले सभी पत्रकार, लेखक बुद्धिजीवी इस विषय पर रिपोर्ट, लेख, कार्टून आदि के द्वारा लोगों को आगाह कर रहे हैं।

जज लोया के प्रकरण पर चीफ जस्टिस की भूमिका पर उंगली खुद सुप्रीमकोर्ट के चार सीनियर मजिस्ट्रेट उठा चुके हैं। कांग्रेस और कई अन्य दलों ने महाभियोग भी लाया , जो बिना जांचे परखे खारिज किया जाकर लोकतंत्र को और करारा झटका दिया जा चुका।

जब चीफ जस्टिस ने जज लोया की संदेहास्पद मृत्यु के मामले पर जांच की मांग खारिज कर देश भर के जनता के संदेह को पुष्ट कर दिया कि देश का सर्वोच्च न्याय पालिका दबाव में है तो वह कार्टून ( जो अब मेरे वाल से सम्भवतः फेसबुक ने हटा लिया है ) कैसे गलत और राष्ट्रद्रोह हो सकता है ।

न्याय की देवी के रूप में आंखों पर पट्टी बांधे और तराजू रखे महिला को इस कार्टून में नीचे गिरा दिखाया गया है,जिसके हाथों को वर्तमान तंत्र के जिम्मेदार राजनीतिज्ञों द्वारा पकड़ कर रखा गया है , इनके सामने देश बांटने वाली विचारधारा के प्रमुख खड़े हुए हैं । तो सच तो यही है , इसमे गलत क्या है । इस कार्टून में न्यायपालिका की स्थिति पर चिंता प्रकट की गई है जो राष्ट्रद्रोह हो ही नही सकता । फिर किसी के फेसबुक पोस्ट पर ये धारा तो लगाया ही नही जा सकता ।

अगर सच कहना ही देश द्रोह है तो फिर से सुन लो , कार्पोरेट के गुलाम मोदी , शाह की रखैल बनी भाजपा की सरकार ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को तहस नहस कर डाला है । न्यायपालिका में अपने चहेतों को बिठा दिया गया है और भाजपा समर्थकों के गम्भीर अपराध माफ किया जा रहा है । भाजपा सरकार को अपने खर्चे से स्थापित करने वाले सेठ अम्बानी ने उनके पक्ष में देश की आधी से ज्यादा मीडिया घराना खरीदकर लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ दी है । यही सच है , मैं बार बार कहूंगा ।

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