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Uttar Pradesh

ब्रेकिंग न्यूज गोरखपुर लोकसभा उप चुनाव : कांग्रेस ने मैदान में उतारा महिला चिकित्सक

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उत्तर प्रदेश में लोकसभा उप चुनाव को लेकर भले ही अन्य दल बेहद गंभीरता की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रत्याशी घोषित करने में कांग्रेस ने बाजी मारी है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर से महिला चिकित्सक को मैदान में उतारा है।

प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस से डा. सुरहिता करीम पर दांव खेला है। डॉ. सुरहिता करीम इससे पहले गोरखपुर में 2012 में मेयर का चुनाव लड़ी थीं। यहां पर कांग्रेस में डॉ.सुहारिता करीब को प्रत्याशी बनाये जाने से पहले खूब माथापच्ची की गई। कांग्रेस की तरफ से गोरखपुर से प्रत्याशी बनाये जाने को लेकर जो नाम गये थे। उसमें सुरहिता करीम का नाम नहीं था। इसी बीच कांग्रेस के महासचिव तथा उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कल सुरहिता करीम को दिल्ली बुलाया और वहीं पर करीब दो घंटे की मंथन के बाद उनके नाम का ऐलान कर दिया।

शहर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुरहिता करीम यूपी कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता हैं। इसके साथ ही वह कई महिला व अन्य संगठनों से भी जुड़ी हुई हैं। इससे पहले वह 2012 में महापौर पद के लिए कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार घोषित हुई थीं। वह इस चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी डॉ. सत्या पाण्डेय से 33156 मतों के अंतर से हारी थीं। डॉ. पाण्डेय को 116559 मत मिले थे तो वहीं डॉ. सुरहिता को 83403 मत मिले। उस चुनाव में सपा की तरफ से कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया गया था। सुरहिता के पति वजाहत करीम लम्बे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं।

 

कांग्रेस फिर से बाबा गोरखनाथ की धरती पर अपना खो गया वजूद पाने की हसरत में है। कांग्रेस अभी किसी भी दल की तरह से कोई भी प्रत्याशी घोषित न होने का भी लाभ लेने के प्रयास में है। एक बार खुद को आजमाने के लिए चुनावी मैदान में उतर रही कांग्रेस ने भले ही आजादी के बाद से छह बार गोरखपुर लोकसभा चुनाव जीता हो पर पिछले छह चुनावों में उसकी जमानत तक जब्त हो गई। कांग्रेस ने बेहद शर्मनाक प्रदर्शन किया है। यहां 1996 (11वीं लोकसभा) में हरिकेश बहादुर ने चुनाव लड़ा और उन्हे मात्र 14549 (2.60 प्रतिशत) वोट मिला था। उनकी जमानत जब्त हो गयी थी।

उसके बाद 1998(12वीं लोकसभा) में हरिकेश बहादुर को 22621 (3.59 प्रतिशत) वोट मिला। एक बार फिर इनकी जमानत जब्त हो गयी। वर्ष 1999 में (13वीं लोकसभा) में कांग्रेस ने डॉ सैयद जमाल को प्रत्याशी बनाया पर हालात नहीं सुधरे और उन्हे 20026 (3.08 प्रतिशत) वोट मिले। इनकी भी जमानत जब्त हो गयी। 2004 (14वीं लोकसभा) में शरदेन्दु पांडेय पर कांग्रेस ने दांव आजमाया और दांव भी यहां पर फेल साबित हुआ। वो भी अपनी जमानत जब्त करवा बैठे। उन्हें 33477 वोट मिला। इसके बाद 2009 में लालचंद निषाद चुनाव लड़े और उनको 30262 वोट मिले। उनकी भी जमानत जब्त हो गयी थी। 2014 (16वीं लोकसभा ) में कांग्रेस ने अष्टभुजा प्रसाद त्रिपाठी पर दांव आजमाया। त्रिपाठी 45693 (4.39 प्रतिशत) वोट पाकर जमानत गंवा बैठे। पिछले छह चुनावों से गोरखपुर में कांग्रेस की स्थिती काफी पतली है।

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