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भूतों का भानगढ़ और भूतों का गांव राजस्‍थान के इन दो इलाकों के बारे में जानते हैं आप

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मानें या ना मानें मगर राजस्‍थान में भानगढ़ का किला और कुलधरा गांव दो ऐसी जगह हैं जो भूतहा मानी जाती हैं और प्रशासन भी यहां रात गए जाने की इजाजत नहीं देता।

कहानी भानगढ़ के किले की

भानगढ़ के किले की कहानी बेहद फिल्‍मी लगती है, जिसमें रोमांस है, रोमांच है और एक्‍शन भी है, लेकिन इसके असली होने पर किसी को शक नहीं है। 16 वीं शताब्दी में भानगढ़ का किला बसाया गया था। इसके बाद 300 सालों तक भानगढ़ काफी फला फूला, इसके बाद किले में एक खूबसूरत राजकुमारी से काले जादू के महारथी तांत्रिक को एक तरफा प्रेम हो गया। इस राजकुमारी का नाम रत्‍नबाला और तांत्रिक का नाम सिंधु सेवड़ा बताया जाता है। राजकुमारी को अपने वश में करने लिए तांत्रिक काला जादू करता है पर खुद ही उसका शिकार हो कर मर जाता है। मरने से पहले वो श्राप दे जाता है कि इस किले में रहने वाले सभी लोग अकाल मृत्‍यु का शिकार बनेंगे और उन्‍हें मोक्ष नहीं मिलेगा बल्‍कि उनकी आत्‍मायें भटकती रहेंगी। संयोग से उसके कुछ समय बात ही पड़ोसी राज्य ने भानगढ़ पर आक्रमण कर दिया और राजकुमारी सहित सभी भानगढ़ वासी मारे गए और किला वीरान हो गया। कहते है कि उस लड़ाई में तब से मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते है, क्योकि उनकी मुक्ति नहीं हो पाई थी। भले ही इस बात को अफवाह कहा जाता है पर आज भी नगर प्रशासन की ओर से अंधेरा होने के बाद किसी को भी भानगढ़ के किले के भीतर या आसपास जाने की इजाजत नहीं है।

भूतों का गांव कुलधरा

भानगढ़ के किले की तरह जैसेलमेर का कुलधरा गांव भी अचानक एक रात में ही वीरान हो गया। उस रात के बाद गांव में कोई बस नहीं पाया। इसके सन्‍नाटे के पीछे भी इसकी एक अजीब दास्तान छुपी हुई है। कुलधरा को हॉन्टेड विलेज कहा जाता है। पूरी तरह से सुनसान हो चुका ये गांव पहले ऐसा नहीं था। यहां के करीब 84 गांव पालिवाल ब्राह्मणों से आबाद हुआ करते थे, लेकिन फिर इस गांव को किसी की बुरी नजर लग गई। कहानी कुछ ऐसी है कि रियासत के दीवान सलीम सिंह को गांव के एक पुजारी की बेटी पसंद आ गई और वो उससे जबरन शादी करने पर आमदा हो गया। उसने गांव वालों को चंद दिनों की मोहलत दी। अब ये लड़ाई एक बेटी के सम्मान के साथ गांव वालों के आत्मसम्मान की बन गई। इसके बाद गांव की पंचायत में बैठक हुई और 5000 से ज्यादा परिवारों ने अपने सम्मान के लिए रियासत छोडऩे का फैसला ले लिया। इसके साथ ही कुलधरा ऐसा वीरान हुआ, कि आज परिंदे भी उस गांव की सरहद में दाखिल नहीं होते। कहते हैं गांव छोड़ते वक्त उन ब्राह्मणों ने इस जगह को श्राप दिया कि इस जगह पर कोई भी रह नहीं पायेगा। तब से ये कहा जाता है कि ये गांव भूतों के कब्जे में है।

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