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मानव तस्‍करी : एफआइआर में आलोक वर्मा, घेरे में दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर बस्सी

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रांची,

दिल्ली के बसंत विहार में बंधक बनी रांची के मांडर की युवती को जिस आलोक वर्मा के घर में बंधक बने रहने की चर्चा है, उसमें बुधवार को कुछ और ही तथ्य सामने आए हैं। पीड़िता ने झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण के सामने आलोक वर्मा की फेसबुक की प्रोफाइल फोटो देख चौंकाने वाली बातें बताईं।

पीड़िता ने आलोक वर्मा के साथ तस्वीर में नजर आ रहे दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर भीम सेन बस्सी की तस्वीर पहचानते हुए उनके ही घर में बंधक बने रहने की बात कही है। उधर, बस्सी ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई है। इस संबंध में बुधवार को महिला थाने में मानव तस्करी व बंधुआ मजदूर रखने की प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें आलोक वर्मा (सिर्फ नाम लिखा है, पदनाम नहीं) के अलावा उसे बेचने में शामिल रही महिला निशिया और गोविंद शर्मा नामजद हैं।

बकौल पीड़िता, उसे इसी वर्ष जुलाई में दिल्ली ले जाया गया था। वहा, किसी प्लेसमेंट एजेंसी में आठ दिनों तक रखने के बाद वसंत विहार के बी ब्लॉक स्थित क्वार्टर नंबर बी 7/2 में बंधक बनाकर रखा गया था। पीड़िता की शिनाख्त के बाद कल्याणी शरण ने कहा कि इस युवती की तस्करी और बंधक बनाए जाने में आलोक वर्मा की भूमिका संदिग्ध है। हाजमोला खिलाकर करवाया जाता था काम पीड़िता ने महिला आयोग को बताया कि बीमार होने के बावजूद उससे काम करवाया जाता था।

पेट खराब होने पर हाजमोला खिलाकर काम कराते थे। मारपीट की जाती थी। बोला जाता था, उसे खरीद लिया गया है। वह अब घर नहीं लौट सकती है। तुम कोई दूसरी लड़की लाकर दो, तभी वापस जा सकती हो। तुम्हें जितने पैसे में खरीदा गया है, वह तुम काम करके भी नहीं चुका सकती।

शेल्टर होम भेजी गई पीड़िता : महिला आयोग ने प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद युवती को शेल्टर होम भेज दिया है। गुरुवार को पीड़िता का 164 का बयान दर्ज करवाया जाएगा। इसके बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पीड़िता ने बताया है कि प्रताडऩा से तंग आकर उसने राची के श्रम विभाग के अधिकारियों का फोन नंबर ढूंढा और बंधक बनाने की जानकारी दी। श्रम विभाग ने दिल्ली महिला आयोग से संपर्क कर उसे आजाद कराया। इसके बाद पुलिस उसे लेकर राची पहुंची।

प्लेसमेंट एजेंसी वालों ने बेचा था : पीड़िता ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उसे टागरबसली की रहने वाली महिला निशिया ने दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी के संचालक यमुना और अशोक के पास भेजा था। वहा से उसे आलोक वर्मा के हाथों बेचा गया था। उसकी एक बहन अब भी दिल्ली में ही फंसी है। वह कहा है, इसकी जानकारी नहीं है। महिला आयोग और राची पुलिस उसका पता लगा रही है।

पुलिस पर सवाल पीड़िता को मंगलवार को राजधानी एक्सप्रेस से राची लाया जा रहा था। लेकिन मीडिया से बचाने के लिए उसे मुरी स्टेशन पर ही उतार लिया गया। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं? क्या किसी वरिष्ठ अफसर को बचाया जा रहा है? क्या वह वाकई किसी अफसर के यहा कैद थी?

सरकारी तंत्र दबाव में, मामले की लीपापोती की कोशिश : मानव तस्करी की शिकार मांडर की लड़की के मामले की लीपापोती में सरकारी तंत्र जुट गया है। इससे इतना तो साफ हो गया है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे किसी बहुत बड़ी ताकत का हाथ है। लड़की को मंगलवार की सुबह महिला आयोग की टीम, उसके समाज के लोगों, सरना समिति के लोगों से बचाते हुए पुलिस ने रहस्यमय तरीके से मुरी में राजधानी एक्सप्रेस से उतार लिया था।

उसे करीब पांच घंटे बाद महिला आयोग के समक्ष रांची में पेश कर प्रेमाश्रय शेल्टर होम में भेज दिया गया। आज सुबह फिर पुलिस अपने साथ ले गई। दोपहर बाद उसे महिला आयोग के समक्ष पेश किया गया। जहां उसने दिल्ली में आलोक वर्मा नामक व्यक्ति के घर में बंधक बनाकर रखने का आरोप दोहराया।

जब पहचान करने की बारी आई तो उसे सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा की तस्वीर के साथ दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी की तस्वीर दिखाई गई। उसने बस्सी की तस्वीर की पहचान आलोक वर्मा के रूप में की। इसके बाद एफआइआर दर्ज कराने की औपचारिकता पूरी कर उसे शेल्टर होम भेज दिया गया।

सुलगते सवाल 1-मानव तस्करी की शिकार लड़की को जब झारखंड महिला आयोग के पास भेजा गया था तो जिला पुलिस ने उसे बीच रास्ते में ट्रेन को रोककर क्यों उतार लिया और अपने साथ ले गई? 2-मुरी में राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन किसके आदेश पर रोकी गई? रेलवे अधिकारी क्यों कुछ कहने से कतरा रहे हैं? 3-पुलिस लड़की के साथ दो दिन के दौरान करीब छह घंटे तक क्या करती रही? उससे क्या और क्यों अनधिकृत रूप से बातचीत की गई?

4-इस दौरान पुलिस ने न तो प्राथमिकी दर्ज कराई और न अधिकृत रूप से कोई पूछताछ की? इसके उलट उसने बयान दिया कि लड़की केस नहीं कराना चाहती है। उसकी मांग सिर्फ मजदूरी दिलाने की है। 5-यदि पुलिस की बात को सच मान भी लिया जाए तो इसमें श्रम कानून भी लागू होता है, ऐसे में उसने श्रम विभाग को अब तक इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई? 6-लड़की का 30 घंटे तक कोर्ट में 164 का बयान क्यों नहीं दर्ज कराया गया? 7-उसे अब तक माता-पिता से क्यों अलग रखा गया?

8-उसके मांडर स्थित घर में अचानक ताला क्यों लग गया? उसके माता-पिता अचानक कहां चले गए? 9-यदि सब कुछ सामान्य है तो ग्रामीण लड़की के घर वालों के बारे में बात करने से क्यों कतरा रहे हैं? 10-केस तो दर्ज कर लिया गया लेकिन ज्यादा जोर मजदूरी के भुगतान पर क्यों दिया जा रहा है।

11-लड़की दिल्ली महिला आयोग के हाथों से होते हुए रांची महिला आयोग के समक्ष दो बार पेश हुई? तब जाकर सात दिन में रांची एफआइआर दर्ज हो सका। 12-पुलिस के कई अधिकारियों के रहते एफआइआर को इतने हल्के तरीके से क्यों बनाया गया है कि आरोपी पर कार्रवाई तो दूर पहचान भी मुश्किल होगी?

नहीं है जानकारी : मुझे कोई जानकारी नहीं है। मेरे यहा से किसी भी झारखंड की लड़की को मुक्त नहीं कराया गया है। मुझे दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हुए तीन साल हो गए हैं। – पूर्व पुलिस आयुक्त भीम सेन बस्सी

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