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लम्बी बीमारी के बाद करुणानिधि की मौत,खबर सुनते हुए तमिलनाडु में शोक की लहर दौड़ गई है

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कावेरी हॉस्पिटल के बुलेटिन के मुताबिक शाम 6.10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली

चेन्नई : डीएमके अध्यक्ष एम. करुणानिधि का मंगलवार की शाम चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल में देहांत हो गया. कई दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी. हॉस्पिटल के बुलेटिन ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की है. करुणानिधि की मौत की खबर सुनते हुए तमिलनाडु में शोक की लहर दौड़ गई है. शाम 6.10 बजे 94 वर्षीय करुणानिधि ने अंतिम सांस ली. करुणानिधि के जाते ही तमिलनाडु की राजनीति के एक बड़े युग का अंत हो गया है. वह पिछले 11 दिनों ने कावेरी हॉस्पिटल में भर्ती थे. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत देश के तमाम राजनीतिक दलों और नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जाने को देश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति बताई है.

चेन्नई स्थित कावेरी हॉस्पिटल के बाहर उनके समर्थकों को जमावड़ा लगा हुआ है. लोगों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है. समर्थकों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. हॉस्पिटल के अलावा करुणानिधि के घर के बाहर भी बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. डीएमके प्रमुख को कावेरी अस्पताल में पहली बार 18 जुलाई को भर्ती कराया गया था. द्रमुक नेता की स्थिति 28 जुलाई को रक्तचाप में गिरावट से बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. वह तभी से अस्पताल में थे.

करुणानिधि का पार्थिव शरीर यहां के कावेरी अस्पताल से उनके गृह नगर गोपालापुरम ले जाया जाएगा. इसके बाद पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन के लिए राजाजी हाल में रखा जाएगा. उनका अंतिम संस्कार बुधवार को होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए चेन्नई रवाना होंगे.

करुणानिधि तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे और वे 60 वर्षों तक लगातार विधायक रहे. उन्होंने भारतीय राजनीति का एक ‘अजेय’ विधायक कहा जाता है. वे ‘द्रविड़ योद्धा’ और ‘कलाइग्नर’ के नाम से मशहूर थे.
उनके देहांत की खबर सुनते ही तमिलनाडु में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. हॉस्पिटल और उनके निवास के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक जुटे हुए हैं और भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है. पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. उनके निधन पर डीएमके का झंडा आधा झुका दिया गया है. राज्य सरकार ने एक दिन के शोक की घोषणा की है. बुधवार को राज्य में अवकाश का ऐलान किया गया है. राज्य परिवहन विभाग ने अस्थाई रूप से अपनी सेवाएं बंद करने का ऐलान किया है.

दक्षिण की सियायत के हीरो करुणानिधि ने ऐसे तय किया था सत्ता का शिखर

राजनीति से पहले वे दक्षिण में हिंदी विरोधी आंदोलन में शामिल हुए थे और अन्नादुराई के निधन के बाद वे 1969 में राज्य के मुख्यमंत्री बने. वे तमिल फिल्मों में पटकथा लेखन का काम भी करते थे. उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल का विरोध किया था.

काला चश्मा उनकी पहचान थी. आंख में संक्रमण के कारण उन्होंने चश्मा पहनना शुरू किया था. 46 साल बाद उन्होंने अपना चश्मा बदला था. डॉक्टर के कहने पर उन्होंने चश्मा बदला. डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी कि काला चश्मा एक भारी फ्रेम का चश्मा है, इसे बदलना चाहिए. डॉक्टरों की सलाह पर जर्मनी में उनके लिए चश्मे की खोज की गई.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि करुणानिधि राजनीति की एक समृद्ध विरासत छोड़कर गए हैं. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि करुणानिधि उनके लिए हमेशा प्रेरणा रहे हैं. दक्षिण भारत के सुपर स्टार रजनीकांत ने कहा कि यह उनके लिए काला दिन है. उन्होंने कहा, ‘मैं उन्हें कभी नहीं भूल सकता, मैंने अपना कलाकार खो दिया है.’

करुणानिधि 5 बार (1969–71, 1971–76, 1989–91, 1996–2001 तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे. उनका निजी जीवन भी बहुत उतार-चढ़ाव वाला रहा. करुणानिधि ने तीन शादियां की. उनकी तीनों पत्‍नी पद्मावती, दयालु आम्माल और राजात्तीयम्माल. उनके बच्‍चे एमके मुत्तु, एमके अलागिरी, एमके स्टालिन और एमके तामिलरसु और पुत्रियां सेल्वी और कानिमोझी हैं. करुणानिधि पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए अपने पुत्र स्‍टालिन को 1989 और 1996 में चुनावों उतारा और जितवाया.

भगवान राम के अस्तित्व पर उठाया था सवाल
करुणानिधि की ईश्वर में आस्था नहीं थी. साल 2007 में जब रामसेतु का मुद्दा उठा था तब करुणानिधि ने राम पर सवाल खड़ा कर दिया था. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘कहा जा रहा है कि 17 लाख साल पहले एक आदमी था, जिसका नाम राम था. उसके बनाए पुल को हाथ न लगाएं. कौन था ये राम? किस इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएट था? इसके सबूत कहां हैं?’

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