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Uttar Pradesh

वन महोत्सव क्या है?

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रामपुुुर।भारत में निरंतर वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ रहा है और जितने पेड़ों की कटाई की जा रही है उसमें से आधे भी नहीं लगाए जा रहे हैं। जिसके कारण वनों को बचाने के लिए सरकार द्वारा जुलाई माह में वन महोत्सव का आयोजन किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग पेड़ लगाएं और एक दूसरे को इस बारे में सचेत करें कि पेड़ लगाना हमारे जीवन के लिए कितना
आवश्यक है।
वन महोत्सव का मुख्य उद्देश्य यही है की सभी जगह पेड़ पौधे लगाए जाएं और वनों के सिकुड़ते क्षेत्र को बचाया जाए। वन महोत्सव सप्ताह में हमारे पूरे देश में लाखों पेड़ लगाए जाते हैं लेकिन दुर्भाग्यवश इनमें से कुछ प्रतिशत ही पेड़ बच पाते हैं। क्योंकि इनकी देखभाल नहीं की जाती है जिसके कारण यह या तो जीव जंतुओं द्वारा खा लिए जाते हैं या फिर जल नहीं मिलने के कारण नष्ट हो जाते हैं। हमारे देश में वनों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन और अप्पी को आंदोलन हुए हैं इन आंदोलनों के कारण ही वन क्षेत्रों की कटाई में थोड़ी कमी आई है।
वन महोत्सव क्यों मनाया जाता है भारत में वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने के लिए सन 1950 में भारत के कृषि मंत्री कन्हैयालाल मणिलाल मुंशी में वन महोत्सव की शुरुआत की थी जिसे पेड़ों का त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है हर साल भारत सरकार जुलाई के प्रथम सप्ताह में संपूर्ण देश में विस्तृत तरीके से वन महोत्सव का आयोजन करती है इस दौरान स्कूलों कॉलेजों और सरकारी व प्राइवेट स्थानों द्वारा पौधा रोपण किया जाता है साथ ही वनों की महत्ता के प्रति सामान लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जाता है
वन महोत्सव की आवश्यकता क्यों पड़ी –
पेड़ों की कटाई के कारण पृथ्वी का वातावरण दूषित होने के साथ-साथ बदल रहा है। जिसके फलस्वरुप आपने देखा होगा कि हिमालय तेजी से पिघल रहा है । इसी का तापमान फिर से बढ़ने लगा है समय वर्षा होती है कहीं पर बाढ़ आ जाती है और कहीं पर तूफान आ रहे हैं जो कि प्रकृति की साफ चेतावनी है कि अगर हम भी सचित्र नहीं हुए तो हर दिन दूर नहीं जब पृथ्वी का विनाश हो जाएगा।
वर्तमान में गर्मियों का समय बड़ गया है और सर्दियों का समय बहुत कम नाम मात्र का ही रह गया है। अगर इतनी तेज धूप में कोई व्यक्ति अगर आधे घंटे भी खड़ा हो जाए तो उसको हेजा जैसी बीमारी हो सकती है या फिर उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
भारत में जितनी तेजी से औद्योगिकरण हुआ है उतनी ही तेजी से वनों की कटाई भी हुई है। लेकिन हम लोगों ने जितनी तेजी से वनों की कटाई की थी पुन: वृक्षारोपण नहीं किया । वन नीति के अनुसार धरती के कुल क्षेत्रफल के 33 प्रतिशत हिस्से पर वन होने चाहिए तभी प्रकृति का संतुलन कायम रहे सकेगा। लेकिन वर्ष 2001 की रिपोर्ट में जो खाने वाले नतीजे सामने आए जिसके अनुसार भारत में केवल 20% वन रह गए हैं।

वनों की कटाई के कारण
1 हमारी देश की बढ़ती हुई जनसंख्या वनों की कटाई का मुख्य कारण है कि जैसे जैसे जनसंख्या वृद्धि हो रही है उस जनसंख्या को जगह और खान- पान की वस्तु की जरुरत भी बढ़ गई है इसलिए वनों की कटाई करके यह सब की पूर्ति की जा रही है
2 आजकल आपने देखा होगा कि आपको घरों में जादातर गेट और खिड़कियां और अन्य घरेलू समान लकड़ी से बनता है और जनसंख्या वृद्धि के साथ लकड़ी की मांग में भी वृद्धि हुई है जी को पूरा करने की लिए वनों की कटाई की जा रही है।
कोरोना काल में विशेषकर हमने यह है देखा है की प्रकृति हमारे हस्तक्षेप के बिना फल फूल रही है। मनुष्य प्रकृति के लिए सदैव ही हानिकारक रहा है।
प्रकृति का संरक्षण ही हमारे विश्व की संरक्षण है।

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