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Uttar Pradesh

सरकारी ‘शपथ’ के भरोसे जीसएवीएम की मान्यता

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कानपुर : चिकित्सीय सेवाएं यूं ही बदहाल नहीं हैं। सुधार की कसम खाकर आश्वासनों की घुट्टी पिलाने से व्यवस्था भला कैसे चंगी हो सकती है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज में भी व्यवस्था सिर्फ इन्हीं कारणों से ‘बीमार’ है। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) के मानक पूरे करने के लिए कालेज में एमआरआइ और सीटी स्कैन मशीन की जरूरत है। आठ माह पहले एमसीआइ के कड़े रुख पर सरकार की तरफ से मोहलत मांगकर छह माह में कमी पूरी करने का शपथपत्र दिया गया था। छह माह गुजर गए, लेकिन मानक पूरे नहीं हुए। दस माह बाद अब प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया हुई। एमसीआइ यहां दोबारा धमक जाए तो मान्यता खतरे में पड़ सकती है। हालांकि सबकुछ जल्द से जल्द ठीक करने के आश्वासनों का सिलसिला जारी है।

उधार की व्यवस्था नकार चुकी एमसीआइ

मेडिकल कालेज में मानक के लिए एमआरआइ और सीटी स्कैन जैसी जांच होती तो है, लेकिन यह व्यवस्था उधार की है। दस साल से वेटलीज के तहत मशीनों से जांच हो रही है। वेटलीज का मतलब, अनुबंध पर बाहर के डायग्नोस्टिक सेंटर की सेवा लेना। इसमें सेंटर अस्पताल के मरीजों के साथ ही बाहर वालों की जांच करने के लिए स्वतंत्र होता है। सितंबर 2017 में एमसीआइ निरीक्षण पर आई तो एमबीबीएस की 200 सीटों के हिसाब से संसाधन एवं फैकल्टी नहीं मिली थी। एमसीआइ ने वेटलीज की मशीन को खारिज कर दिया। सीटी स्कैन और एमआरआइ मशीन, लाइब्रेरी, अलग परीक्षा भवन तथा लांड्री जरूरी बताई थी।

इनसेट

बाहर है महंगी जाच

वेटलीज व्यवस्था में एलएलआर अस्पताल में त्वरित जांच सुविधा नहीं मिल पाती है। बाहर सीटी स्कैन एवं एमआरआइ जांच बहुत ही महंगी है। जरूरी होने पर मरीज मजबूरी में बाहर जांच कराते हैं।

बाहर के रेट

2500 रुपये उर्सला में एमआरआइ जांच

700 रुपये उर्सला में सीटी स्कैन जांच

3500 रुपये एलएलआर में एमआरआइ जांच

700 रुपये एलएलआर में सीटी स्कैन जांच

5500 रुपये प्राइवेट में एमआरआइ जांच

1800 रुपये प्राइवेट में सीटी स्कैन जांच

एमसीआइ की आपत्तियों को दूर किया जा रहा है। कुछ स्थानीय स्तर से दूर की गई हैं, कुछ के लिए प्रस्ताव भेजा है। सीटी स्कैन मशीन के लिए आठ करोड़ व एमआरआइ मशीन के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।

– डॉ. नवनीत कुमार, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

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