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सरहद पर युद्ध जैसे हालात, जवान शहीद, नागरिकों की मौत, जवाबी कार्रवाई जारी

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जम्मू, [राज्य ब्यूरो] । जम्मू संभाग के कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा से पुंछ में नियंत्रण रेखा तक 18 सेक्टरों में पाकिस्तान की ओर से की जा रही भारी गोलाबारी से युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। पाकिस्तान ने शुक्रवार को 50 से ज्यादा चौकियों और 100 से अधिक गांवों पर जमकर मोर्टार दागे। इसमें सीमा सुरक्षा बल व सेना के दो जवान शहीद और दो स्थानीय लोगों की मौत हो गई, जबकि दो जवानों सहित 24 लोग घायल हैं। पिछले तीन दिन में चार जवानों की शहादत सहित कुल सात की मौत व 33 घायल हो चुके हैं। गोलाबारी में दर्जनों इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। 50 से अधिक मवेशियों की मौत व करीब 100 घायल हैं। वहीं पाक गोलाबारी का भारत ने भी कड़ा जवाब दिया।

 

सीमा पार भी भारी नुकसान की सूचना है। सीमांत क्षेत्रों में हालात को देखते हुए 15 से ज्यादा गांव खाली हो गए हैं। ग्रामीण अपने परिवारों सहित राहत शिविरों व अपने रिश्तेदारों के घर आ गए हैं। प्रशासन ने सीमांत क्षेत्रों में स्कूलों को भी अगले आदेश तक बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है।शहीदों की पहचान सीमा सुरक्षा बल की 173वीं वाहिनी के हेड कांस्टेबल जगपाल सिंह निवासी सलामपुर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश तथा सेना की छह मद्रास रेजिमेंट के लांस नायक (34) सैम अब्राहम निवासी केरल के रूप में हुई है। वहीं आरएसपुरा में गोलाबारी में मारे गए लोगों की पहचान सई खुर्द की 50 वर्षीय बचनो देवी पत्नी जीत राज व कोरोटाना के 20 वर्षीय साहिल चौधरी के रूप में हुई है। शुक्रवार सुबह पौने सात बजे पाकिस्तानी रेंजर्स ने कठुआ, सांबा व जम्मू जिले में एक साथ तीन दर्जन के करीब चौकियों व सभी सीमांत गांवों पर गोले दागने शुरू कर दिए। अधिक नुकसान जम्मू जिले के आरएसपुरा में हुआ। सई खुर्द व कोरोटाना खुर्द में गिरे मोर्टार के गोलों से दो लोगों की मौत और सात लोग घायल हो गए। सांबा सेक्टर की चलयाड़ी पोस्ट पर पाकिस्तान की अकरम शहीद पोस्ट से गोलाबारी में सीमा सुरक्षा बल के हेड कांस्टेबल जगपाल सिंह शहीद हो गए। इसी दौरान रामगढ़ सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल की 176वीं वाहिनी के दो जवान हेड कांस्टेबल सत पाल सिंह व हेड कांस्टेबल आदर्श गोलाबारी से घायल हो गए। इसके अलावा रामगढ़ सेक्टर के गांव मालशाह में तिलक राज व गांव खाखरेचक में रंजीत सिंह घायल हो गए। वहीं अखनूर के बट्टल सेक्टर में सेना के लांस नायक सैम अब्राहम भी गोलाबारी में शहीद हो गए। देर शाम गोलाबारी में रामगढ़ में सुखजिंदर व बालाकोट में सद्दाख खान घायल हो गए।

इन सेक्टरों में हो रही गोलाबारी :

कठुआ जिला : हीरानगर सेक्टर, सांबा जिला : रामगढ़ सेक्टर, जम्मू जिला : अरनिया, आरएसपुरा व अखनूर सेक्टर,  राजौरी जिला : मंजाकोट, गंभीर, झंगड़, कलसियां, कलाल, भवानी व लाम सेक्टर।पुंछ जिला : तरकुंडी, बालाकोट, बीजी, मनकोट, मेंछर, व पुंछ सेक्टर।

बार्डर पर युद्ध जैसे हालात

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की ज्वाला को और धधकाने के मकसद से पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों में गोलाबारी की आड़ में आतंकियों को इस ओर घुसपैठ करवाने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। इसे पाकिस्तान की बौखलाहट ही कहेंगे कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और अतंरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित पचास से अधिक भारतीय चौकियों को निशाना बनाया। पिछले चौबीस घंटे से जारी गोलाबारी में तीन जवानों सहित छह लोगों की मौत हो गई। गोलाबारी में अभी तक 32 लोग घायल हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो राज्य में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। पांच जिलों के 18 सेक्टरों के अंतर्गत 100 से अधिक गांव इस समय गोलाबारी की चपेट में हैं। विडंबना यह है कि सोलह गांवों के करीब पचास हजार लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सीमा सुरक्षा बल दुश्मनों का मुंह तोड़ जवाब दे रहा है। पाकिस्तान ने पिछले सितंबर से शांत पड़े अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी कर सरकार को यह जताने की कोशिश की है कि जम्मू-कश्मीर एक अशांत क्षेत्र है और जब चाहे वह गोलाबारी कर जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है। इसमें पाकिस्तान की बौखलाहट झलकती है, जिसका खामियाजा सीमांत लोगों को उठाना पड़ रहा है।

जम्मू के आरएसपुरा के अरनिया, रामगढ़, हीरानगर और अखनूर के परगवाल और कानाचक्क सब सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से रिहायशी इलाकों में जारी गोलाबारी कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं कि वे अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आएगा। बेशक भारतीय जवान गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दे रहे है, लेकिन गोलाबारी से प्रभावित लोग भी अब स्थायी समाधान चाहते हैं। जम्मू- कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र रणभूमि बन कर रह गए हैं। उन्हें लगता है कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाए क्योंकि सीमांत वासियों ने अपनों को खोया है। उनके दर्द को वही समझ सकते हैं जिन्होंने अपने करीबियों को गंवाया है। गोलाबारी के कारण बच्चों की पढ़ाई से लेकर किसानों की दिनचर्या प्रभावित होकर रह गई है। इस समय सीमांत क्षेत्रों में गेहूं की फसल पर भी असर पड़ रहा है। किसान अपने खेतों में जा नहीं पा रहे। बीएसएफ ने भी किसानों को बार्डर के साथ लगते खेतों में जाने से मना किया हुआ है। अगर गोलाबारी और चलती है तो किसानों की रोजी रोटी पर बन आएगी। गत वर्ष भी पाकिस्तान ने दिवाली के आसपास गोलाबारी की थी, जिससे जानमाल का काफी नुकसान हुआ था।

सरकार को चाहिए कि वे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जमीन मुहैया करवाए ताकि वे गोलाबारी की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित इन इलाकों में चले जाएं। विडंबना यह है कि सरकार अपने वायदे पर नहीं उतर पाई है जिस कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर सिर ढकने की जगह तो क्या उन्हें सुरक्षा के लिए बंकर तक मुहैया नहीं करवा पाई है। अब समय आ चुका है कि सरकार को सीमांत लोगों की सुध लेनी होगी।

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