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🔺मामला प्रभारी मंत्री द्वारा चैपाल के दौरान 18 के विरूद्ध कार्यवाही के निर्देश का।

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🔺शिक्षकों के आरोप विभाग से कार्यक्रम में उपस्थित होने का नहीं मिला था आदेश।

🔺कार्यवाही के पश्चात् मामले को गरमाते देख, शिथिलता बरते जाने की चर्चा शुरू।

*अम्बेडकर नगर———–* पिछले दिनों शिक्षा क्षेत्र कटेहरी के प्रतापपुर चमुर्खा में प्रभारी मंत्री द्वारा आयोजित चैपाल में शिक्षकों के निलम्बन का असली जिम्मेदार कौन है।
*इसकी तह मेेेें न तो मंत्री गये और न ही डीएम।*
*जब कि इस कार्यवाही के बाद से ही विरोध के स्वर मुखर हो गये है।*
हालाकि मामले में शिथिलता बरते जाने की चर्चा शुरू हो गयी है।
*ज्ञात हो कि जिले के प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल द्वारा विकास कार्यो की समीक्षा को लेकर उक्त गांव में चैपाल कार्यक्रम गत सप्ताह आयोजित किया गया था।*
जिसमें खण्ड विकास अधिकारी से लेकर सभी विभागों के अधिकारी, डीएम व भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता आदि मौजूद थे।
*बताया जाता है कि चैपाल कार्यक्रम में सम्बंधित शिक्षा क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की उपस्थिति भी अनिवार्य है किन्तु इस मौके पर 18 शिक्षक अनुपस्थित पाये गये।* इससे खफा मंत्री ने तत्काल प्रभाव से बीएसए को निलम्बित किये जाने का फरमान जारी कर दिया।
इसके बाद से ही भूचाल आ गया।
*मामला शिक्षक संघ प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में आया और वहां से अनुमति मिलते ही शिक्षक आन्दोलन की राह पकड़ लिये।*
तहसील स्तर से लेकर जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन व ज्ञापन के सिलसिला शुरू हो गये। विपक्षी दल भी सरकार पर तानाशाही के आरोप लगाने लगे और शिक्षकों के समर्थन की घोषणा भी कर दिये।
*इतना बवाल आखिर क्यों हुआ।*
*इस तह में कोई जाने की जहमत नहीं उठाया।*
जब कि निलम्बित शिक्षकों का कहना है कि उन्हे मंत्री के कार्यक्रम की विभाग से कोई सूचना ही नहीं दी गयी तो ऐसी दशा में चैपाल में जाने का कोई मतलब ही नहीं था।
*यदि ऐसा रहा तो कुल मिलाकर विभाग को ही दोषी कहा जा सकता है।*
ऐेसे में शिक्षकों को मंत्री द्वारा कोपभाजन के शिकार बनाये जाने व इसे लेकर हो रहे विरोध का असली जिम्मेदार कौन है। *एबीएसए, बीएसए व डीएम को लेकर जनमानस में चर्चा का विषय बना है।*
लोगों का कहना है कि सचिव हो अथवा मंत्री उनके द्वारा किसी गांव में जांच व चैपाल लगाये जाने के दौरान किन-किन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहेगे।
*यह पहले से ही तय होकर उसकी सूची आलाहाकिम तक होनी चाहिए।*
फिर भी सम्बंधित न पहुॅचे तो उनके खिलाफ कार्यवाही किया जाना न्यायोचित है किन्तु *शिक्षकों के मामले में उन्हे सूचना दी गयी अथवा नही, के बारे में किसी ने जाने का प्रयास ही नहीं किया।*
बस शिक्षकों की लापरवाही मानते हुये उन्हे निलम्बित कर दिया गया।
*हालाकि कई दिनों से चल रहे संगठन के विरोध व विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया को देखते हुये निलम्बन की कार्यवाही स्थगित होने की चर्चा है।

ब्यूरो -अशुमालि कान्त चतुर्वेदी

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