कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद कब्जे का आरोप, तहसील और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

पीड़ित ने एसडीएम से लगाई गुहार, कहा—न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने में प्रशासन और पुलिस प्रशासन अक्षम


गोरखपुर। सदर तहसील व रामगढ़ थाना क्षेत्र के रामपुर तारामंडल में न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर कब्जे के प्रयास का मामला सामने आया है। मामले में पीड़ित पक्ष ने तहसील प्रशासन और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उप जिलाधिकारी सदर को प्रार्थना पत्र देकर न्यायालय के आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराने की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि न्यायालय द्वारा विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद विपक्षी पक्ष लगातार जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।प्रार्थना पत्र के मुताबिक, रामपुर तारामंडल में आराजी संख्या 178मी, रकबा 0.676 हेक्टेयर भूमि को लेकर विवाद चल रहा है। प्रार्थी के अनुसार उक्त भूमि उसके परिवार की पुरानी संपत्ति है और राजस्व अभिलेखों में उसका नाम दर्ज है। संपत्ति पर कब्जे को लेकर विवाद बढ़ने के बाद प्रार्थी ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन), गोरखपुर की अदालत में वाद संख्या 293/25, इंद्रसेन बनाम अवधेश सिंह दाखिल किया।बताया गया है कि मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विवादित संपत्ति के संबंध में विपक्षीगण को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। प्रार्थी के अनुसार उक्त आदेश की अवधि बाद में 6 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई। आरोप है कि विपक्षी पक्ष को न्यायालय के आदेश की जानकारी होने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है।

टिनशेड डालकर कब्जे का प्रयास करने का आरोप

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि 26 अगस्त 2026 को अर्चना सिंह, उनके पति सतीश सिंह, रामा यादव समेत कई लोग विवादित भूमि पर पहुंचे। आरोप है कि उनके द्वारा जमीन पर टिनशेड डालने का प्रयास किया गया। मौके पर विरोध और शोर-शराबा होने के बाद संबंधित लोग धमकी देते हुए वहां से चले गए।पीड़ित का कहना है कि घटना की सूचना तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को दी गई। इसके बाद अर्चना सिंह, सतीश सिंह, टुन्नू उर्फ रामहर्ष यादव पुत्र गणेश यादव, जोगिंदर यादव उर्फ कन्नूर यादव, राम यादव पुत्र अज्ञात समेत अन्य लोगों के मौके पर पहुंचने और जबरन कार्य करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

पुलिस के रवैये पर भी सवाल

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस को सूचना देने के बावजूद विवादित स्थल पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप के अनुसार पुलिस ने मौके पर जाने के बजाय तहसीलदार और एसडीएम के पास जाने की बात कही। इससे पीड़ित पक्ष का कहना है कि उसे न्यायालय के आदेश के बावजूद अपनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष के लोगों का मनोबल बढ़ा हुआ है और वे मौके पर अराजकता की स्थिति पैदा कर रहे हैं। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो बढ़ सकता है विवाद’

पीड़ित पक्ष ने एसडीएम से मांग की है कि न्यायालय द्वारा पारित स्थगन/यथास्थिति आदेश का तत्काल मौके पर अनुपालन कराया जाए। साथ ही विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण अथवा कब्जे के प्रयास को रोका जाए और प्रार्थना पत्र में नामित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।पीड़ित का कहना है कि तहसील प्रशासन और पुलिस प्रशासन न्यायालय के स्पष्ट आदेश का अनुपालन कराने में स्वयं को अक्षम साबित कर रहे हैं, जिससे विपक्षी पक्ष को विवादित भूमि पर स्थिति बदलने का अवसर मिल रहा है। यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो विवाद और गंभीर रूप ले सकता है।मामले में अब निगाहें तहसील प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। वहीं, प्रार्थी द्वारा न्यायालय के आदेश की प्रति एवं संबंधित दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

क्या कहते हैं थानाध्यक्ष रामगढ़ ताल

दूरभाष द्वारा संपर्क होने पर उनके द्वारा बताया गया कि तहसीलदार सदर द्वारा मौखिक बताया गया है कि निर्माण कार्य हो सकता है कृपया रामगढ़ ताल पुलिस इस प्रकरण पर कोई कार्रवाई न करें।

क्या कहते है तहसीलदार

इस प्रकरण को लेकर तहसीलदार सदर ने कहा मामला आप मीडिया बंधु के द्वारा संज्ञान में आया है मौके की जांचकरा कार्रवाई की जाएगी

अजब गजब है हाल उपजिलाधिकारी को नहीं है संज्ञान

इस प्रकरण के संबंध में उपजिलाधिकारी सदर ने दूरभाष द्वारा पूछे जाने पर बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है कानूनगो को जांचकर अखियां देने के लिए कहा गया है ।