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20 रुपये में बनाएं तीन सौ एकड़ के लिए जैविक खाद

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हल्द्वानी : जी हां आपने बिल्कुल सही सुना, महज 20 रुपये मे किसान जैविक खाद तैयार कर तीन सौ एकड़ खेत की सेहत सुधार सकते है। इसके लिए वेस्ट डीकंपोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र गाजियाबाद ने इसे ईजाद किया है। महज तीस एमएल की एक शीशी की कीमत बीस रुपये है, लेकिन इससे बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार की जा सकती है।

रासायनिक खादो के अतिशय प्रयोग से खेतो की सेहत निरंतर बिगड़ रही है। ऐसे मे किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत वेस्ट डीकंपोजर तैयार किया गया है। वेस्ट डीकंपोजर की एक शीशी से दो सौ लीटर घोल तैयार किया जाता है। जैविक कचरे के ढेर पर डीकंपोजर से तैयार घोल को डाला जाता है, जिससे महज कुछ ही दिनों में कचरा सड़कर जैविक खाद में तब्दील हो जाता है।

बाजार मे ढाई सौ रुपये है कीमत

उत्‍तराखंड में अभी इसकी उपलब्धता नहीं है, लेकिन जिन राज्यों में यह मिल रहा है किसान इसे खरीद कर आजमा रहे हैं। खुले बाजार में वेस्ट डीकंपोजर की एक शीशी की कीमत ढाई सौ रुपये के आसपास है, लेकिन सहकारी कृषि निवेश केंद्रों पर किसानों की जैविक खाद बनाने के लिए बीस रुपये में यह शीशी उपलब्ध कराई जाती है। डीकंपोजर में ऐसे बैक्टीरिया, फंगस आदि को शामिल होते हैं, जो बहुत कम समय में कूड़े के खाद में बदल देते हैं।

एक एकड़ में तीन टन खाद

तीस एमएल की शीशी से दस हजार टन जैविक खाद तैयार होती है। एक एकड़ में तकरीबन तीन टन जैविक खाद का इस्तेमाल होता है। डीकंपोजर की एक शीशी को दो सौ लीटर पानी के साथ खाने वाला गुड़ मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। तकरीबन छह दिनों तक घोल का ढक कर रखा जाता है। इस दौरान लकड़ी से घोल को बीच-बीच में अच्छी तरह मिलाया जाता है। छह दिनों बाद जब घोल पूरी तरह तैयार हो जाए तो इसे गोबर के ढेर अथवा कूड़े के ढेर पर डाला जाता है।

गाजियाबाद से हमने डीकंपोजर मंगवाया और गौलापार, चोरगलिया, गोरापड़ाव, हिम्मतपुर मल्ला में कई जगह जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण देने के बाद इसे खेतों में आजमा रहे हैं।

– अनिल पांडे, जैविक मास्टर ट्रेनर

जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिससे रासायनिक खादों के उपयोग को कम किया जा सके। साथ ही वर्मी कंपोस्ट खाद के साथ ही जैविक खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। धनपत कुमार, जिला कृषि अधिकारी

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