सराहनीय कार्यसिद्धार्थनगर

प्रदेश सरकार मत्स्य पालकों को दे रही है आर्थिक सहायता।

प्रदेश सरकार मत्स्य पालकों को दे रही है आर्थिक सहायता।

सिद्धार्थनगर।

प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधनों का मत्स्य विकास हेतु उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य है। मानव जीवन के खाद्य पदार्थों में मछली उत्तम प्रोटीनयुक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थ रहा है। मत्स्य पालन रोजी-रोटी का अच्छा साधन भी है। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में मत्स्य पालक विकास अभिकरण स्थापित किये गये हैं, जो नीली क्रान्ति को गतिमयता देने के लिए कृत संकल्पित है। ग्रामीण अंचलों में स्थित तालाबों में मछली पालन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बड़े व मध्यम आकार के मानव निर्मित जलाशयों एवं विभागीय प्रबन्ध व्यवस्था के अन्तर्गत प्राकृतिक झीलों में मत्स्य की प्रबन्ध व्यवस्था, एक ही वातावरण में साथ-साथ रहकर एक दूसरे को क्षति न पहुंचाते हुए तेजी से बढ़ने वाली पालन योग्य मत्स्य प्रजातियों के बीज का उत्पादन, रोजगार सृजन, मत्स्य व्यवसाय में आदिकाल से जुड़े हुए मछुआ समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए प्रदेश सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किये हैं।
प्रदेश में केन्द्र सरकार के सहयोग से ब्लू रिवोल्यूशन इन्टीग्रेटेड डेवलपमेंट एण्ड मैनेजमेंट आॅफ फिशरीज योजना (नीली क्रान्ति) संचालित है। प्रदेश में इस वर्ष नीली क्रान्ति योजना के अन्तर्गत तालाब सुधार योजना, तालाब सुधार में प्रथम वर्ष का निवेश में 248 लाभार्थियों को अनुदान वितरित किया गया तथा निजी भूमि पर तालाब निर्माण, निजी भूमि पर तालाब निर्माण में प्रथम वर्ष का निवेश में 409 लाभार्थियों को अनुदान वितरित कराया गया। नीली क्रान्ति योजना के अन्तर्गत 01 मत्स्य बीज हैचरी के निर्माण तथा 02 लघु फीड मिल, 350 मोटर साइकिल विद आइस बाक्स तथा महिलाओं के लिए 08 रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। प्रदेश में 4234.23 हे0 जलक्षेत्र के तालाबों का पट्टा कराते हुए 4839 परिवारों को मत्स्य पालन हेतु लाभान्वित कराया गया। वर्ष 2019-20 में द्वितीय त्रैमास तक समस्त óोतों से 2.85 लाख मि0 टन मत्स्य उत्पादन किया गया। 27473.25 लाख मत्स्य पालकों को मत्स्य बीज वितरण किया गया। मछुआ दुर्घटना बीमा योजना के अन्तर्गत 1,34,014 मत्स्य पालकों को आच्छादित किया गया। नीली क्रान्ति योजना के अन्तर्गत वर्ष 2019-20 में सामान्य वर्ग हेतु 448 आवासों के निर्माण हेतु धनराशि अवमुक्त तथा अनुसूचित जाति हेतु 100 आवासों एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग हेतु 52 आवासों के निर्माण हेतु धनराशि वितरित की गयी। जिसमें 372 आवास निर्मित तथा शेष आवास निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त 296 आवासों की धनराशि अवमुक्त होने की प्रक्रिया में हैं। प्रदेश के मत्स्य पालकों को मत्स्य पालन हेतु प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत इस वर्ष 1039 किसान क्रेडिट कार्ड निर्गत कराये गये।
प्रदेश में नवोन्मेषी कार्यक्रम के अन्तर्गत आगरा एवं अलीगढ़ मण्डल के खारे पानी जलजीव पालन में óिम्प पालन का कार्य किया जा रहा है तथा उक्त मण्डलों में अन्य प्रजातियों के खारे पानी जलजीव पालन का कार्य भी कराया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा के लिए भारत सरहार के सहयोग से मत्स्य पालन/व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों की दुर्घटना में मृत्यु/अपंगता की स्थिति में सहायता प्रदान किये जाने के दृष्टिगत मछुआ दुर्घटना बीमा योजना संचालित है जिसमें मृत्यु एवं पूर्ण अपंगता में रु0 2 लाख की धनराशि तथा आंशिक अपंगता में रु0 1 लाख की बीमा की धनराशि उपलब्ध करायी जाती है साथ ही आश्रयहीन तथा दुर्बल आय वर्ग के व्यक्तियों को निःशुल्क आवास की सुविधा उपलब्ध है। जिसमें रु0 1.20 लाख प्रति आवास इकाई लागत के आधार पर मछुआ आवासों के निर्माण की योजना प्रदेश मेें सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। प्रदेश में मछुआरों के कल्याण हेतु मछुआ कल्याण कोष की स्थापना रु0 25 करोड़ से की गयी है।

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