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सिलेंडर में लगी महंगाई की आंच, झुलसे उपभोक्ता,

सिलेंडर में लगी महंगाई की आंच, झुलसे उपभोक्ता

बढ़नी सिद्धार्थनगर
गैस सिलेंडर के बढ़े दामों की वजह से आम आदमी के रसोई का बजट बिगड़ गया है। बढ़नी में अब तक 790 रुपये रसोई गैस सिलेंडर का रेट था, जो अब 950 रुपये हो गया है। पहले रसोई गैस सब्सिडी 221 रुपये के करीब जा रही थी, अब यह 355 रुपये हो जाएगी। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित वह उपभोक्ता होंगे जिन्होंने अपनी सब्सिडी छोड़ दी है। बताया जाता है की विद्यालयों में प्रत्येक माह सैकड़ों से अधिक सिलिडर का उपयोग होता है। वह गैर सब्सिडी वाले सिलिडर ही लेते हैं, उन्हें इससे करारा चपत लगेगा। 12 सिलिंडर पर सब्सिडी देती है सरकार एक वर्ष में प्रत्येक घर के लिए 14.2 किलोग्राम के 12 सिलिडरों पर सब्सिडी देती है। अगर इससे अधिक सिलेंडर चाहिए तो बाजार मूल्य पर खरीदारी करनी होती है। हालांकि सरकार हर साल 12 सिलिंडरों पर जो सब्सिडी देती है, उसकी कीमत भी महीने-दर-महीने बदलती रहती है। औसत अंतरराष्ट्रीय बेंच मार्क और विदेशी विनिमय दरों में बदलाव जैसे कारक सब्सिडी की राशि निर्धारित करते हैं। कस्बे के महिलाओ का कहना है की आए दिन सिलिंडर के बढ़ते दामों ने रसोईघर का बजट बिगाड़ दिया है। जब गैस महंगी होगी तो खाना कैसे बनेगा। गैर सब्सिडी वाले सिलिंडर पर भले ही यह दाम प्रभावी है लेकिन गरीब परिवार के लोगों को एक साथ इतना पैसा जुटाना मुश्किल होता है। सरकार को गैस के बढ़ते हुए दामों की ओर ध्यान देना चाहिए। सामान भी महंगा, गैस भी महंगी। आम आदमी तो परेशान होना पड़ा रहा है। हर समय दाम बढ़ने से परिवार का बजट बिगड़ जाता है। गैस की जरूरत तो हर वक्त रहती है। गैस के दाम बढऩे से घर का बजट बिगड़ जाएगा। आखिर कब तक उपभोक्ता बढ़े हुए पैसे देते रहेंगे। सरकार को रसोईं गैस के दाम पर ध्यान देना चाहिए। कीमतें बहुत अधिक बढ़ गई हैं कि अब रसोई सिलिंडर लेने से पहले सोचना पड़ेगा। तीन माह में अब तक यह तीसरी बार सिलिंडर महंगा हुआ है। उपभोक्ता इससे परेशान हो जा रहे हैं। सरकार को दाम को नियंत्रित करना चाहिए।

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