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LUCKNOW

चाय बेचने वाला ऐसे बन गया करोड़पति, चलता है सफारी से

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वर्ल्ड फेमस ओरछा के राम राजा मंदिर के क्लर्क मुन्ना भंडारी पर हेराफेरी का आरोप लगा है। उनके ख‍िलाफ गबन सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि हेराफेरी करोड़ों में हुई है। मामले की जांच की जा रही है, आरोपी फरार है।आपको क्लर्क मुन्ना भंडारी के बारे में बताने जा रहा है कि कैसे चाय की दुकान लगाने वाले के पास आज करोड़ों की संपत्त‍ि है।
झांसी से करीब 18 किलोमीटर दूर ओरछा में श्री रामराजा मंदिर है। बताया जाता है कि यह एकमात्र मंदिर है, जहां श्रीराम को भगवान की बजाय राजा माना जाता है। इसलिए रोजाना श्रीराम को यहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है।
– मंदिर में मुन्ना लाल तिवारी उर्फ मुन्ना भंडारी करीब 20 साल से क्लर्क के रूप में काम कर रहा था। उसके ऊपर मंदिर के खजाने में हेरा-फेरी करने का आरोप लगा है।
– सामाजिक कार्यकर्ता राघवेंद्र राय ने इसकी श‍िकायत की थी, जिसके बाद टीकमगढ़ डीएम प्रियंका ने जांच के आदेश दिए। SDM आदित्य सिंह पिछले 2 महीने से मामले की जांच कर रहे थे।
– SDM ने बताया, जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जिससे साबित हुआ है कि मंदिर में आने वाले दान और अन्य आर्थ‍िक मामलों में हेराफेरी की गई। आरोपी क्लर्क के ख‍िलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मंदिर के खर्च का लाखों का भुगतान बिना बाउचर के किया गया। सोने के भी 24 आइटम गायब मिले।
– मंदिर में कुल 28 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, दानपेटी के सामने वाला कैमरा खराब पाया गया। ऐसा जानबूझकर किया गया। गुप्त दान करने वालों का कोई हिसाब नहीं रखा गया। इसके साथ ही सुबह-शाम लगाए जाने वाले भोग और आने वाली पोशाकों के हिसाब में भी गड़बड़ी की गई।
– यही नहीं, भुगतान के लिए मंदिर के व्यवस्थापक नायब तहसीलदार के फर्जी दस्तखत भी किए गए।
– स्थानीय लोगों ने नायब तहसीलदार पर भी कार्रवाई की मांग की है। नायब तहसीलदार मंदिर का व्यवस्थापक होता है। लोगों का कहना है कि व्यवस्थापक के बिना हेराफेरी संभव नहीं है। मिली भगत की जांच होनी चाहिए।

मुन्ना लाल तिवारी टीकमगढ़ जिले के गोरा गांव का रहने वाला है। 1990 में वो ओरछा आया, 7 साल तक यहां रामराजा मंदिर के बाहर चाय की दुकान लगाई।
– 1997 में वह तत्कालीन क्लर्क लक्ष्मण सिंह के जरिए मंदिर से जुड़ा। उन्हीं के जरिए वह आने वाले लोगों को वितरित किए जाने वाले प्रसाद/भंडारे का भंडारी बन गया।
– कुछ साल बाद लक्ष्मण सिंह की मृत्यु के बाद वह मंदिर का क्लर्क बन गया। इसके लिए उसे 10 हजार रुपए महीना सेलिरी मिलती थी। क्लर्क के पद पर रहते हुए मुन्ना सफारी कार से चलने लगा। एप्पल का लैपटॉप रखता है।
– ओरछा में उसके 3 मकान हैं। जिस घर में वह रहता था, वह कई बीघे में बना है। 2 बच्चे हैं, जोकि झांसी के सबसे महंगे स्कूल में पढ़ते हैं, जहां महीने की फीस हजारों में है।

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