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यूपी विधानसभा में मिले संदिग्ध पाउडर की एक्सपायरी किट से हुई जांच

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एफएसएल लखनऊ की रिपोर्ट के आधार पर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस बात की घोषणा की थी कि सदन में पाया गया संदिग्ध पाउडर प्लास्टिक विस्फोटक पेंटायरेथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट (PETN) था. बाद में, एफएसएल आगरा ने संदिग्ध पावडर की जांच की और बताया कि पाया गया पावडर पीईटीएन नहीं था. मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी.
नोट में कहा गया है कि जांच के लिए एक्सपायर हो चुके किट का प्रयोग करके उपाध्याय ने राज्य पुलिस के मुखिया और सूबे की सरकार को गुमराह किया. इस तरह की जांच के लिए प्रयोग की जाने वाली किट मार्च 2016 में ही एक्सपायर हो चुकी थी और एफएसएल डायरेक्टर ही भ्रम फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि उन्हें मामले की पूरी जानकारी थी.
नोट में आगे कहा गया है कि उपाध्याय ने सैंपल को जांच के लिए आगरा भेजे जाने के मामले में भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अंधेरे में रखा. गौरतलब है कि विस्फोटक पदार्थ एक्ट के तहत संदिग्ध वस्तुओं की जांच की सुविधा यूपी में केवल आगरा में ही उपलब्ध है. साथ ही इस बात का भी जिक्र किया गया है कि यूपी के प्रमुख सचिव (गृह) ने उपाध्याय को निर्देश दिया था कि आगरा लैब की रिपोर्ट किसी और को फॉरवर्ड न की जाए.

बता दें कि किट के द्वारा स्पॉट पर किए टेस्ट को केवल प्राथमिक माना जाता है और कोर्ट इसे स्वीकार नहीं करती है. यही कारण है कि पुष्टि के लिए मेन लैब में टेस्ट जरूरी होता है.

एफएसएल लखनऊ के तीन फोरेंसिक एक्सपर्ट में से फिजिक्स के डिप्टी डायरेक्टर और कम्प्यूटर फोरेंसिक डिविजन के अरुण कुमार शर्मा, फिजिक्स डिविजन के साइंटिफिक ऑफिसर नरेंद्र कुमार और केमिस्ट्री डिविजन के साइंटिफिक ऑफिसर मनोज कुमार ने संदिग्ध पदार्थ को पीईटीएन बताया था.

यूपी डीजीपी ने विस्तृत रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा है, जिसमें राज्य गृह विभाग से उपाध्याय को सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है.

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