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रोहिंग्याओं के लिए क्यों मुश्किल हो रही है दुनिया

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रोहिंग्या अल्पसंख्यकों का दुनिया के किसी भी देश, शहर या कोने में रहना खतरनाक होता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से म्यांमार के रखाइन में रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन, उनके घर, गांव जलाए जाने की घटना और उन्हें म्यांमार से खदेड़े जाने की घटना ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

लेकिन यह मामला सिर्फ रोहिंग्या मुसलमानों का नहीं बल्कि दुनिया भर में रह रहे अल्पसंख्यकों का है। दुनिया के हर कोने में आज अल्पसंख्यकों का हाल बेहाल हो चुका है। चाहें वो पाकिस्तान में रह रहे हिंदू हों या फिर बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू।
रोहिंग्या भी म्यांमार में अल्पसंख्यक हैं और वे बौद्ध बहुल क्षेत्र रखाइन में रहते हैं। रखाइन बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ प्रांत है। म्यांमार में रोहिंग्या की आबादी लगभग 10 लाख है। जबकि संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के मुताबिक करीब इतने ही रोहिंग्या बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान के साथ एशिया के कई देशों में शरण लिए हुए हैं।
म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ आग तो 2012 में सुलगनी शुरू हो गई थी जब रोहिंग्या पर आरोप लगा था कि उन्होंने कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी है। और फिर बौद्धों और मुसलमानों में दंगे भड़कने शुरू हो गए लेकिन मामला तब और बढ़ गया जब 25 अगस्त को रोहिंग्या मुसलमानों ने दर्जनों पुलिस वालों पर हमला कर दिया।

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