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Sultanpur

फेसबुक पर दोस्ती,लाखों में खरीदा वीजा,सऊदी पहुंचे और फिर नहीं मिली नौकरी

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सुल्तानपुर(निसार अहमद)।कादीपुर कोतवाली के मोहल्ला तुलसी नगर निवासी जुनैद अहमद पुत्र कमरुद्दीन की वर्ष 2020 में सीएम सिटी के निवासी वीजा एजेंट आरिफ से फेसबुक पर दोस्ती हुई।आरिफ सऊदी अरब में ही रह रहा था। जुनैद ने आरिफ से अपने लिए वीजे की पेशकश की।सऊदी पहुंचने पर आरिफ ने उससे ढाई लाख रुपये और मांगे,नहीं देने पर आरिफ ने जुनैद को भगा दिया।बुरे फंस जाने पर जुनैद ने कादीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक को मामले से अवगत कराया
अब्दुल हक ने 15 जून को विदेश मंत्री को एक पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया।फेसबुक पर सुलतानपुर के जुनैद की गोरखपुर के वीजा एजेंट आरिफ से दोस्ती हुई। कुछ दिन बाद जुनैद ने एजेंट से एक लाख 70 हजार का वीजा लिया और सऊदी अरब पहुंच गया। सऊदी पहुंचने पर आरिफ ने उससे ढाई लाख रुपये और मांगे,नहीं देने पर आरिफ ने जुनैद को भगा दिया। करीब 11 महीने ठोकरें खाने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक के प्रयास से वो वापस देश लौटे।दरअसल,ये पूरा मामला जिले के कादीपुर कोतवाली क्षेत्र का है। कादीपुर कोतवाली के मोहल्ला तुलसी नगर निवासी जुनैद अहमद पुत्र कमरुद्दीन की वर्ष 2020 में सीएम सिटी के निवासी वीजा एजेंट आरिफ से फेसबुक पर दोस्ती हुई। आरिफ सऊदी अरब में ही रह रहा था। जुनैद ने आरिफ से अपने लिए वीजे की पेशकश की। इस पर वीजा एजेंट ने एक लाख 70 हजार का वीजा जुनैद को उपलब्ध कराया।बीते वर्ष 8 मार्च को जुनैद रोजी-रोटी के लिए लखनऊ एयरपोर्ट से सऊदी अरब के लिए रवाना हुआ। सऊदी पहुंचने के बाद आरिफ ने अकामा जारी कराने के लिए उससे ढाई लाख की और डिमांड की। नहीं देने पर उसने जुनैद को अपने पास से भगा दिया। बुरे फंस जाने पर जुनैद ने कादीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक को मामले से अवगत कराया। इस मामले में अब्दुल हक ने 15 जून को विदेश मंत्री को एक पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया।विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के दूतावास ने डेल्टा कंपनी को तीन-तीन बार रिमाइंडर लिखकर भेजा।रिमाइंडर का जवाब न देने पर सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक ने विदेश मंत्री के संयुक्त सचिव से मुलाकात करके इसकी शिकायत की।शिकायत के बाद संयुक्त सचिव ने POE मुंबई को फोन के माध्यम से डेल्टा कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर देने के निर्देश दिए। ब्लैक लिस्ट करने के बाद कंपनी के लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक से संपर्क किया और जुनैद के बारे में जानकारी ली। लोकेशन पर पहुंचकर कंपनी के जुनैद को अपने ऑफिस ले गए, 11 महीने के प्रयास के बाद वो अब सऊदी अरब से वतन वापस लौट सके।

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