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केले की पौध के बीच हो रही फूल गोभी की खेती

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मुसाफिरखाना-अमेठी(ब्यूरो)।पहले सब्जी की व्यापारिक खेती में हाथ आजमा चुके गाजनपुर के टार्जन सिंह इन दिनों केले के साथ फूल गोभी की खेती कर रहे हैं। इंटर क्रॉपिंग तकनीकी से केले की फसल को तैयार करने में आने वाले खर्च को सब्जी से निकालने की तैयारी कर रहे हैं।

गोमती पार सब्जी की व्यापारिक खेती में लाभ कमा चुके गाजनपुर के टार्जन सिंह इन दिनों बड़े पैमाने पर केले की खेती में हाथ आजमाने का मंसूबा पाल रखा है। इसी के तहत वे लगभग 15 बीघे जमीन पर केले की लगभग चार हजार पौध का रोपण भी कर चुके हैं। गांव के कुछ और किसान भी केले की खेती में हाथ आजमा रहे हैं। टार्जन सिंह का कहना है कि केले की पौध को तैयार करने में आने वाले खर्च को निकालने के लिए केले की पौध के बीच ही फूल गोभी की पौध का भी रोपण इनके द्वारा किया गया। फूल गोभी की फसल तैयार होकर बाजार में बिकने के लिए भेजी भी जाने लगी है। टार्जन सिंह कहते हैं कि अगर खेती को आमदनी का जरिया बनाना है तो धान- गेंहूँ की परंपरागत खेती को छोड़कर नई तकनीक के साथ व्यवसायिक खेती किसानों को अपनाना होगा। इसके लिए इंटर क्रॉपिंग तकनीक एक बेहतर विकल्प है। इस तकनीक में एक फसल की पौध के बीच खाली जगह में दूसरी फसल तैयार की जाती है। दूसरी फसल पहली फसल के लिए बीमा का कार्य करती है। इस तकनीक में नुकसान की कोई संभावना नहीं होती है और किसान की आय भी बढ़ जाती है।

इनसेट-

इंटर क्रॉपिंग के मिल रहे सुखद परिणाम: मनीष

” इंटरक्रॉपिंग तकनीकी से आलू- शिमला मिर्च, अमरूद- मटर, यूकेलिप्टस-कालमेघ जैसी खेती से कई किसान लाभ कमा चुके हैं। इन किसानों की सफलता से दूसरे किसानों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। किसानों को बीज, पौधों की प्रजाति, रोग निवारण आदि विषय समय- समय पर सपोर्ट दिया जा रहा है। जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।”

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