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पीलीभीत

करोड़ों की संपत्ति को आखिर किस हैसियत से प्रबंधक ने बेचा

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1974 में वक्फ बोर्ड की जमीन की बिक्री किए जाने के खुलासे से मचा हड़कंप

महज 3 हजार में नगर के एक व्यापारी के को किया गया था बैनामा

दो प्रबंधकों के बीच उपजे विवाद के बाद परत दर परत खुल रही पोल

सुरेश जायसवाल

बिलसंडा। नगर से सटे गांव घनश्यामपुर में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की करोड़ों की जमीन को वर्ष 1974 में नगर के ही एक व्यापारी के हाथ बिक्री किए जाने का खुलासा होने से संबंधित लोगों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि पिछले कुछ महीनों से वक्फ बोर्ड की बची हुई जमीन के आधिपत्य को लेकर दो प्रबंधकों के बीच विवाद चल रहा है । जो अब न्यायालय में भी पहुंच चुका है। पूर्व में वक्फ की जमीन बिक्री किए जाने के खुलासे से बीसलपुर के कथित प्रबंधक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोप है कि कथित प्रबंधक आज जमीन पर अपना आधिपत्य जमाने को लेकर जितना सक्रिय है। उससे पहले वह उसी जमीन को खुर्द बुर्द करने में लगा रहा।
बता दें कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की बेशकीमती करोड़ों रुपयों की जमीन पर यूं तो काफी लोगों की पहले से ही नजर है। जिसकी वजह से बीसलपुर के एक कथित प्रबंधक रजीउद्दीन शमशी को चंद रुपयों का लालच देकर आसानी से वक्फ की जमीन पर ऐसे ही कुछ लोग काबिज भी हो गए। इसी जमीन के संरक्षण को लेकर सपा नेता अंसार मंसूरी ने वक्फ बोर्ड से मिलकर कमेटी गठित कराई थी ।जिसमें वह खुद प्रबंधक बने थे। अंसार की गठित कमेटी को फर्जी करार देते हुए बीसलपुर के कथित प्रबंधक ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी का अभियोग पंजीकृत करा दिया। जिसकी विवेचना अब स्थानीय पुलिस से हटाकर डीसीआरबी को सौंपी जा चुकी है। इतना ही नहीं वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर कोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है। ऐसे में वक्फ बोर्ड की बेशकीमती जमीन को वर्ष 1974 में कथित प्रबंधक के पिता रहीसुद्दीन शमशी द्वारा महज 3 हजार रुपयों में बिक्री किए जाने का खुलासा हुआ है। बिक्री की गई जमीन की गाटा संख्या 136 /1 रकबा 93 डिसमिल है। उर्दू में हुए बैनामे की कॉपी निकलवाने के साथ ही उसे हिंदी में रूपांतर भी कराई गई है।उधर सपा नेता अंसार मंसूरी का कहना है कि वक्फ बोर्ड की जमीन किसी की निजी संपत्ति नहीं है। लिहाजा किसी को भी बेचने का अधिकार नहीं है। गलत तरीके से नगर के व्यापारी भगवतशरण के नाम बैनामा किया गया जिसे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बहरहाल स्थिति जो भी हो हाल ही में सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर बनाए गए नए नियम कानून की वजह से भी अब कथित प्रबंधक की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।

इनसेट

वर्ष 1907 में 2 लोगों ने वक्फ को दान में दी थी जमीन

बिलसंडा। नगर निवासी जहीरूद्दीन और फखरुद्दीन ने वर्ष 1907 में वक्फ बोर्ड लखनऊ के लिए के लिए दान दी थी।दान देते वक्त उनके द्वारा इस शर्त रखी गई थी कि इस जमीन की आमदनी से गरीब बेसहारा लोगों की मदद की जाएगी और आमदनी से मदरसा स्थापित कर बच्चों को निशुल्क तालीम दिलाई जाएगी। लेकिन ऐसा आज तक नहीं हुआ। अभी तक इस जमीन से जो भी आमदनी हुई ,उसका धेला भी वक्फ बोर्ड में जमा नहीं किया गया। इसी 93 डिसमिल जमीन का उन्होंने वर्क बोर्ड के नाम बैनामा भी किया था। वर्ष 1974 में इसी जमीन को प्रबंधक रईसुद्दीन ने एक व्यापारी के हाथ बिक्री कर दिया था।

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