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Sultanpur

लंभुआ विधायक देवमणि दुबे की वोट डालने की हसरत रह गई अधूरी!

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वोटर लिस्ट से विधायक का नाम गायब

सोशल मीडिया पर छाया वोट न डाल पाने का मुद्दा

सुल्तानपुर(विनोद पाठक)। लंभुआ विधायक देवमणि दुबे हमेशा सुर्खियों में बने हुए हैं। पहले पत्नी का टिकट कटा तक सुर्खियों में आए। फिर भाई को प्रतिनिधि पद से पद मुक्त किया, तब सुर्खियों में चले। इसके बाद भाई को की पत्नी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया तो भी चर्चा में रहे। अब लोकतंत्र के इस महापर्व में फिर से एक बार लंभुआ विधायक देवमणि दूबे का नाम चर्चा में चल रहा है। हुआ यूं कि जब अपनी पत्नी के साथ मतदान केंद्र पर वोट डालने गए तो पता चला कि लिस्ट से विधायक का नाम ही गायब है। वोट डालने से विधायक की हसरत अधूरी रह गई। इस पर विधायक आगबबूला हुए और कहा कि लिस्ट में नाम न होना गंभीर है, इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब हो कि लंभुआ के भाजपा विधायक देवमणि इन दिनों सुर्खियों में चल रहे हैं।विधायक देवमणि का सुर्खियों में चलने का सिलसिला त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से शुरू हुआ। विधायक देवमणि दुबे अपनी पत्नी रेखा दुबे को वार्ड नंबर 45 से भाजपा का समर्थन प्राप्त कर चुनाव लड़ना चाह रहे थे। लेकिन भाजपा ने उनका टिकट येन वक़्त पर काट दिया। यही नहीं भाजपा के दबाव में बागी के तौर पर उनके भाई चिंतामणि की पत्नी विभा द्विवेदी वार्ड नंबर 43 से चुनाव लड़ रही थी। जिस पर अपने भाई को अपने प्रतिनिधि पद से पद मुक्त कर दिया। यह सिलसिला यहां पर भी नहीं रुका। भाजपा हाई कमान ने चिंतामणि की पत्नी विभा द्विवेदी को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। इन सब मामलों को लेकर हमेशा विधायक देवमणि दुबे सुर्खियों में बने रहे। अब ताजा मामला सामने आया है। लोकतंत्र के इस महापर्व में वोट डालने अपनी पत्नी के साथ मतदान केंद्र पहुंचे तो विधायक को पता चला कि वोटर लिस्ट से ही उनका नाम गायब है। वोट डालने की हसरत विधायक देवमणि दुबे की पूरा नहीं हो पाई। हालांकि उनकी पत्नी ने अपने मत का प्रयोग किया। विधायक का नाम वोटर लिस्ट में न होने और मतदान से वंचित रहने पर यह मुद्दा सोशल मीडिया पर सुर्खियों में चल रहा है। विधायक देवमणि दुबे ने कहा कि एक विधायक का वोटर लिस्ट में नाम न होना गंभीर मामला है, इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ककराही कमअपोजिट विद्यालय लंभुआ मतदान केंद्र के बूथ नंबर 127 पर मतदान विधायक को करना था। लेकिन उनकी वोट देने की हसरत इस लोकतंत्र के महापर्व पर अधूरी रह गई। बहरहाल हो कुछ भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विधायक के लिए अशुभ साबित हुआ है। इसकी चर्चा भाजपाइयों के बीच चल रही है।

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