Hardoi

3 महीने पहले लापता हुई बच्ची मिशन आत्म संतुष्टि के जरिए मिली परिजनों से

 

हरदोई ( अनुराग गुप्ता ) । 3 महीने पहले हरदोई की महिला थाना पुलिस को एक बच्ची लावारिस हालत में घूमते हुए मिली, जिसे पुलिस ने मिशन आत्मसंतुष्टि के पुनर्वास केंद्र पर पहुंचाया। जहां उस बच्ची की देखरेख की जा रही थी। मिशन आत्मसंतुष्टि के प्रयासों से यह बच्ची अपने परिजनों से वापस मिल सकी। मिशन आत्मसंतुष्टि के प्रयास की बच्ची के परिजनों ने दिल खोलकर प्रशंसा की और आभार व्यक्त किया।

आपको बता दें कि हरदोई के वरिष्ठ समाजसेवी राजवर्धन सिंह राजू ने मिशन आत्मसंतुष्टि की स्थापना की थी। समाजसेवी राजू, मिशन आत्मसंतुष्टि के जरिए गरीब जरूरतमंदों की मदद करने के अलावा लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं। इसके अलावा लावारिस लोगों की अपने पुनर्वास केंद्र पर देखरेख भी करते हैं। समाजसेवी राजू ने बताया कि 31 मार्च 2020 को हरदोई की महिला थाना पुलिस को एक बच्ची लावारिस हालत में घूमते हुए मिली थी। पुलिस ने इस बच्ची से पूछताछ करने और उसके परिजनों के बारे में जानकारी करने का काफी प्रयास किया, लेकिन कोई भी जानकारी हासिल नहीं हो सकी। लिहाजा पुलिस ने इस बच्ची को मिशन आत्मसंतुष्टि के पुनर्वास केंद्र पर भेज दिया । जहां उसकी देखरेख की जा रही थी । इस दौरान बच्ची का लगातार इलाज भी होता रहा, ताकि उसकी मानसिक स्थिति ठीक हो सके, और आखिरकार जब उसके स्वास्थ्य में सुधार हुआ, तो बच्ची ने स्वयं ही अपने परिवार से मिलने की इच्छा जाहिर की, और बताया कि वह कानपुर की रहने वाली है। समाजसेवी राजू को जब उसके परिवार के बारे में जानकारी हुई, तो उन्होंने तत्काल बच्ची के परिवार से संपर्क साधा, और बच्ची के बारे में बताया। कानपुर के धुमनी बाजार के सुरेश चंद्र जायसवाल ने बताया कि उसकी बेटी 3 महीने पहले अचानक कहीं लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद भी जब वह नहीं मिली, तो स्थानीय थाने पर गुमशुदगी की सूचना भी दर्ज कराई गई थी। बेटी को सामने पाकर पिता सुरेश चंद जायसवाल हैरान थे। दरअसल उन्होंने अपनी बच्ची के सही सलामत होने की आस भी खो दी थी, लेकिन मिशन आत्मसंतुष्टि के प्रयासों से एक पिता को उसकी बेटी मिल गई। सुरेश चंद्र असवाल ने मिशन संतुष्टि के कार्य को सराहाते हुए समाजसेवी राजू का दिल से आभार व्यक्त किया। आपको बता दें कि अभी हाल ही में मिशन आत्मसंतुष्टि के जरिए ही अमेठी की एक युवती भी अपने परिजनों से मिल सकी थी। मिशन आत्मसंतुष्टि के इन कार्यों को समाज भी जमकर सराहा रहा है।

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