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कोरोना को रोकने के लिए केंद्र का लॉकडाउन फेल – राहुल गांधी

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नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को एक बार फिर वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से बात कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने वे जमकर मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी ने 21 दिन में कोरोना की लड़ाई जीतने की बात कही थी। लगभग 60 दिन हो चुके हैं। हिंदुस्तान पहला देश है, जो बीमारी के बढ़ते वक़्त लॉकडाउन हटा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के बाकी देशों ने लॉकडाउन तब हटाया, जब बीमारी कम होनी शुरू हो गई थी। राहुल गांधी ने लॉकडाउन को विफल करार देते हुए कहा कि जो लक्ष्य मोदी जी का था, वो पूरा नहीं हुआ।

कांग्रेस नेता ने कहा, लॉकडाउन को फेल हो गया, अब हम भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए आपके पास ‘प्लान बी’ क्या है? उन्होंने कहा कि बीमारी 21 दिन में कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ रही है।

राहुल गांधी के सवाल और आरोप

राहुल गांधी ने प्रश्न करते हुए कहा, प्रधानमंत्री जी की रणनीति क्या है? लॉकडाउन से कैसे निपटोगे? मजदूर भाई-बहनों, MSMEs की मदद कैसे करोगे? ये राजनीति नहीं है, बल्कि मेरी चिंता है। बीमारी बढ़ती जा रही है। इसलिए ये सवाल मैं पूछ रहा हूँ। उन्होंने कहा कि पैकेज के बारे में कई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुईं, हमें बहुत उम्मीदें थीं, पीएम ने कहा था कि यह जीडीपी का 10% होगा। वास्तविकता यह है कि ये जीडीपी के 1% से भी कम है और उसमें भी ज्यादातर लोन है, नकद नहीं।

हमारी सरकार को केंद्र से नहीं मिल रहा समर्थन

राहुल गांधी ने कहा कि कुछ राज्यों में हमारी सरकार है, हम किसानों, मजदूरों को सीधे नकद दे रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। केंद्र सरकार के पर्याप्त समर्थन के बिना हमारे राज्यों के लिए कार्य करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैं नहीं जाना चाहता कि सरकार विफल क्यों रही, वो बीत चुका है। मुझे अभी इस बात को जानना है कि भारत अभी जिस चीज का सामना कर रहा है, वो है- एक असफल लॉकडाउन है। उन्होंने देश के कई राज्यों में बीमारी बढ़ने की बात कही।

राहुल गांधी ने कहा, ‘आगे सरकार की क्या योजना है ? कांग्रेस शासित राज्यों के पास रणनीति है- हम गरीबों को पैसा और भोजन दे रहे हैं, प्रवासियों का प्रबंधन कर रहे हैं, टेस्ट बढ़ा रहे हैं। लेकिन राज्यों के पास केंद्र सरकार की मदद के बिना कोई रणनीति नहीं हो सकती।

राहुल गांधी ने कहा- केंद्र क्या करने की योजना बना रही है

कांग्रेस सांसद बोले कि मुझे हमारे मुख्यमंत्रियों ने बताया कि वे अकेले लड़ाई लड़ रहे हैं। वे आश्वस्त हैं और समझते हैं कि उन्हें क्या करना है, लेकिन केंद्र सरकार क्या करने की योजना बना रही है?

बीच का रास्ता निकालना होगा

राहुल बोले कि स्वास्थ्य या अर्थव्यवस्था वाली बात से मैं सहमत नहीं हूं। मुझे लगता है कि हम स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के बीच एक सही रास्ता बनाने के लिए आगे बढ़ना होगा, जिसके लिए हम सक्षम भी हैं।

बेरोजगारी का सामना

उन्होंने आगे कहा कि भारत एक बहुत ही गंभीर ‘बेरोजगारी’ समस्या का सामना कर रहा है। मेक इन इंडिया और अन्य पहलों ने सही परिणाम नहीं दिए हैं। अब कोरोना ने बेरोजगारी की समस्या को कई गुना बढ़ा दिया है। एक राष्ट्रीय नेता के रूप में यह कहना खेदजनक है, लेकिन MSME दिवालिया हो जाएंगे, लोग बेरोजगार हो जाएंगे और इसलिए हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि MSME और गरीबों को पैसे की आवश्यकता है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह घातक होगा।

राहुल ने एक बार दोहराया कि अगर आर्थिक सहायता नहीं दी, MSMEs की रक्षा नहीं की तो जो नुकसान अब तक हुआ है, उससे ज्यादा होने की संभावना है। मेरा निवेदन है कि आर्थिक सहायता करने की जरूरत है।

चीन पर क्या बोले राहुल?

राहुल ने एक सवाल के उत्तर में कहा, ‘भारत-चीन का मुद्दा अभी चल रहा है। उस पर मैं ज्यादा नहीं बोलना चाहता। उसको मैं सरकार की बुद्धिमानी पर छोड़ता हूं। मगर पारदर्शिता की जरूर आवश्यकता है, क्योंकि पारदर्शिता के बिना मेरा इस पर बोलना सही नहीं होगा।

7500 देने होंगे

राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं दोहरा रहा हूं कि हिंदुस्तान की शक्ति बाहर से नहीं, बल्कि देश के भीतर से बनती है। जब देश मजबूत होता है, तब हमारी छवि बनती है। इसके लिए हमारे 50% गरीब लोगों को ₹7500 देने होंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि उनका भरोसा टूट गया है। मेरा मानना है कि अमीर, गरीब या हिंदू, मुस्लिम या सिख, किसी का भरोसा नहीं टूटना चाहिए। हम अभी भी कार्य कर सकते हैं, गरीबों की मदद कर सकते हैं, प्रति माह ₹7500 दे सकते हैं।

यूपी के बस विवाद पर क्‍या बोले राहुल?

उत्‍तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों के लिए बसों से जुड़े विवाद पर राहुल ने कहा, ‘लोग पहले भारतीय हैं और फिर वे राज्‍यों के। कोई किस राज्‍य से कहां जाकर काम करेगा, यह किसी राज्‍य का मुख्‍यमंत्री नहीं तय करेगा।’ राहुल ने कहा कि ‘यूपी सीएम ने मजदूरों को पर्सनल प्रॉपर्टी की तरह यूज किया है।’

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