Uttar Pradesh

डीएवीपी अखबारों में ही मान्य होगी निविदा, टेंडर प्रक्रिया में मानक की अनदेखी, होगी कार्रवाई

गोण्डा(रमेश पाण्डेय)। ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति के लिए एक लाख रूपये से अधिक के काम में निविदा/टेंडर प्रकाशित की जाती है। ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा अपने चहेतों से गोपनीय तरीके से मानक विहीन अखबारों में निविदा/टेंडर प्रकाशित करवाया जा रहा है, यह काम जिले के कई ब्लाकों में धड़ल्ले से चल रहा है, सब जानकर भी जिम्मेदार बेखबर है।
गोण्डा जनपद के लगभग ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान व सचिव बिना मानक के निविदा/टेंडर छपवा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की गाइडलाइन के अनुसार निविदाएँ मात्र डीएवीपी प्राप्त अखबारों में ही प्रकाशित करवानी है, वो भी सूचना विभाग से सम्बद्ध हो। लेकिन यहाँ पड़ताल की जाए तो ऐसे बहुत से समाचार पत्रों में निविदाएँ छप रही हैं। जो कि न तो सूचना विभाग में सूचीबद्ध हैं न ही उनको डीएवीपी द्वारा रेट जारी किया गया है। ग्राम प्रधानों व सचिवों की मिलीभगत से यह कार्य कई वर्षों से होता आ रहा है। प्रधान और सचिव अपने मिलने वालों से टेंडर डलवाकर काम करा लेते हैं। टेंडर डालने वाले अपने होते हैं, तो रेट भी अपने हिसाब से लगाते हैं। जहाँ जनपद में डीएम से लेकर आलाधिकारी हर मामले में चौकन्ने नजर आते हैं, वही इस मामले में प्रशासन की आंखे बंद हो जाती है। इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की नींव भर चुकी है कि न तो इस मामले में डीपीआरओ संज्ञान लेते है न ही उस क्षेत्र के खंड विकास अधिकारी।

*क्या है शासन की गाइडलाइन*

शासन की गाइडलाइन के मुताबिक दो प्रमुख समाचार पत्रों में निविदाओं का प्रकाशन अनिवार्य है। निविदा/विज्ञापन उन्ही समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाना है जो डीएवीपी से मान्यता प्राप्त हों, सूचना विभाग से सम्बद्ध हों, जिनका प्रसार क्षेत्र में होता हो। लेकिन गोण्डा जनपद में ऐसा नहीं हो रहा है, यहां धड़ल्ले से गैर प्रचलित अखबारों में विज्ञापन दिए जा रहे हैं जिनका सरकारी रिकॉर्ड में अस्तित्व ही नहीं। जब दैनिक छपते ही नहीं तो डीएवीपी से मान्यता का कोई वास्ता ही नहीं।

*अगर हो जांच तो खुले राज*

ग्राम पंचायतों की विभिन्न योजनाओं, राज्य वित्त, 14वां व 15वां वित्त, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि और मनरेगा के अंतर्गत आवंटित की जाने वाली धनराशि से कराए जाने वाले कार्यों में प्रथम श्रेणी ईंट, इंटर लॉकिंग ईंट, सरिया, सीमेंट, पेंट, बोल्डर, बालू, मोरंग व अन्य सामग्री की आपूर्ति के लिए गैर प्रचलित अखबारों में नियमों को दरकिनार कर निकाली जा रही निविदाओं में खेल किया जा रहा है। यदि बारीकी से जांच हो तो लाखों की जीएसटी चोरी भी पकड़ी जाये।

*शासनादेश की अवहेलना क्षम्य नहीं : सीडीओ*

इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि डीपीआरओ के माध्यम से जिले के सभी बीडीओ को हिदायत दी गई है। जांच में अगर कोई निविदा गैर प्रचलित अखबार में प्रकाशित मिली तो उस टेंडर को निरस्त कर फिर से निविदा निकाली जाएगी। किसी भी बीडीओ या सेक्रेट्री से यह नहीं कहा गया है, कि किसी अमुक अखबार में निविदा का प्रकाशन करवाए। शासनादेश की अवहेलना किसी भी प्रकार से क्षम्य नहीं होगी।

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