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महराजी के मुकाबले महराज,33 साल बाद फिर विधानसभा में जाने की तैयारी

33 साल बाद फिर विधानसभा में जाने की तैयारी

अमेठी(ब्यूरो)। लोकतंत्र की स्थापना के बाद राजतंत्र तो समाप्त हो गया लेकिन अमेठी के तमाम लोग अभी भी संजय सिंह को महराज ही कहते हैं। स्वयं संजय सिंह अपने को राजा नहीं जानता का सेवक मानते हैं। वे कहते हैं कि जमीदारी चली गई, जिम्मेदारी बाकी है और इसी भावना के तहत अमेठी को अपना परिवार मानते हुए अमेठी के निरंतर विकास में लगे रहते हैं। बात हाई प्रोफाइल अमेठी विधानसभा सीट की जहाँ पर भाजपा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश की राजनीति में बड़ा स्थान रखने वाले अमेठी रियासत के डॉक्टर संजय सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी बनाकर राजनीतिक गलियारों में एक नया माहौल बना दिया। धारा 370 के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले डा. संजय सिंह को अमेठी विधानसभा सीट से भाजपा का उम्मीदवार घोषित किया गया है। डॉ. संजय सिंह 33 साल बाद विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। डॉ0 संजय सिंह ने अपनी सियासी पारी कांग्रेस नेता संजय गांधी के साथ शुरू की थी। गांधी नेहरू परिवार बेहद करीबी रहे 1980 के चुनाव में कांग्रेस से विधायक बने। 1985 के चुनाव में भी कांग्रेस से विधायक रहे। इस दौरान प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री भी थे। धारा 370 के मुद्दे पर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता और कांग्रेस पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। अमेठी विधानसभा सीट से गरिमा सिंह 2017 के चुनाव में विजयी हुई थी। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने संजय सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। अमेठी विधानसभा से नामांकन करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया आपको बता दें भाजपा के संजय सिंह तो वहीं भाजपा से बागी हुए आशीष शुक्ला को कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है । उनके सामने सपा के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी भी ताल ठोक रही है । मुकाबला दिलचस्प दिलचस्प होगा अमेठी विधानसभा की जनता किसे अपना विधायक बनाती है।

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