Sultanpur

गुजरे “बचपना” में खोए कुलपति को आया “ख्याल”

मातृभूमि का “ममत्व-अपनत्व” पैतृक गांव की तरफ रहा खींच

पैतृक गांव के अंतराल की दूरी को कम करने का “ढूंढ” निकाला तरीका

मित्र उद्यमियों से क्षेत्र में स्थापित कराएंगे शिक्षा का बहुत बड़ा संस्थान

सुल्तानपुर(विनोद पाठक)।
कुलपति बढ़ती उम्र के पड़ाव से प्रेरित मातृभूमि का ममत्व और अपनत्व अपनी तरफ खींच रही है। क्षेत्र के विकास के लिए कुछ कर गुजरना चाहते हैं। जिससे कि शिक्षा के क्षेत्र को बल मिले। इसके लिए मन में कुछ “खाका” तैयार किया है। शिक्षा का विकास क्षेत्र में ऐसा हो कि आने वाली पीढ़ियां उन्हें ‘याद’ करें। इसके लिए बहुत जल्द “अमलीजामा” अपने व्यवसायिक “मित्र” उद्यमियों के साथ मिल कर पहनाने की कोशिश करेंगे, जो क्षेत्र के विकास के लिए आने वाले समय में “मील का पत्थर” साबित हो सकता है।
गौरतलब होगी जिले के अखंड नगर क्षेत्र के बिहार आभारी गांव के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रोफेसर अखिलेश पांडे मौजूदा समय में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति है जो बड़े ही मिलनसार सादगी पसंद कर्तव्यनिष्ठ बीसी है जिनके रग-रग में शिक्षा के प्रति लगाव और विकास है अभी हाल में 2 दिन पहले गृह जनपद सुल्तानपुर आए पैतृक गांव परिवार के साथ जाते समय शैशवावस्था की संजोई यादें ताजा हो गई। गुजरा बचपना “हिलोर” मारने लगा। जिस विद्यालय से बीज और अंकगणित का ककहरा के साथ “एबीसीडी” सीखी थी, गुजरे बचपन में खो गए थे। उच्च प्राथमिक स्कूल पहुचे। कुलपति प्रो. अखिलेश पांडेय को अपने बीच पाकर शिक्षकगणों के खुशी का भी ठिकाना न रहा। कुलपति ने कुछ क्षण स्कूल में बिताए। शिक्षकों के साथ बच्चों के शिक्षा के स्तर को को परखा,शिक्षा की गुणवत्ता भी परखी। तब और अब की पढ़ाई के अंतर को समझा और साझा किया। शिक्षकों और बच्चों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। पैतृक गांव बेहराभारी पहुचे। कुलपति की दर्शन की ललक पाले सगे संबंधी के साथ बाल सखा भी आ धमके। मिलान का अद्भुत दृश्य की झलक भी दिखी।पैतृक गांव के लंबे अंतराल की दूरी कम करने का तरीका भी कुलपति ने ढूंढ निकाला। ताकि शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र का बेमिशाल विकास हो।गुजरे बचपना के ख्याल में डूबे कुलपति ने सपना पाल रखा है,साकार करने का ख्याल भी आया। क्षेत्र में कॉलेज तो बहुतेरे खोले गए हैं, लेकिन कालेज भी ऐसा हो, जो विकास का “मिसाल” पेश करे,जो अब तक का शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा संस्था हो। जहां पर क्षेत्र समेत जिले के छात्र छात्रों को हर शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण मिले। ऐसा सपना कुलपति ने “संजो” के रखा। साथ ही जिस उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की है, उसका भी विकास और कायाकल्प हो सके, उस विद्यालय के विकास का भी खाका कुलपति प्रोफ़ेसर अखिलेश पांडेय के मन में है। कुलपति प्रोफेसर अखिलेश पांडेय ने बयां किया कि आने वाले समय में अपने व्यवसायिक उद्यमी मित्रों से मिलकर क्षेत्र में अब तक के स्थापित शिक्षा संस्थानों से बड़ा शिक्षा का संस्थान खुलवाने के लिए प्रयासरत होंगे। इस पर “अमलीजामा” जल्दी पहनाने की कोशिश करूंगा। जिससे कि क्षेत्र के छात्र छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूरदराज न जाना पड़े। ऐसा सपना पाल रखा हूं, निश्चित तौर पर साकार होगा। फिलहाल कुलपति प्रोफेसर अखिलेश पांडेय अपने सगे संबंधी शुभचिंतकों से मुलाकात कर गदगद हैं। भाजपा जिला मीडिया संयोजक अरुण द्विवेदी के घर भी कुलपति प्रो. अखिलेश पांडेय पहुंचे और कुशल क्षेम पूछा। पूरा द्विवेदी परिवार कुलपति के सादगी पूर्ण व्यवहार का “कायल” हो गया और गदगद है। कुलपति को बधाई देने और स्वागत करने वालों में सांसद प्रतिनिधि रंजीत कुमार, भाजपा मीडिया प्रभारी विजय सिंह रघुवंशी, दिलीप कुमार मिश्र, राज कुमार श्रीवास्तव, सत्य कुमार तिवारी, अजय कुमार पांडेय आदि रहे।

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